अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों सहित कई लक्ष्यों पर जवाबी हमले किए। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता गहरा गई है।
नई दिल्ली/तेहरान। पश्चिम एशिया में एक बार फिर हालात तेजी से बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर आईआरजीसी (IRGC) के हमलों के बाद अमेरिका ने दक्षिणी ईरान में कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार इन हमलों में 8 ईरानी सैनिकों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।
बताया गया है कि बंदर अब्बास और बुशहर क्षेत्र में स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों समेत कई लक्ष्यों पर जवाबी कार्रवाई की। इससे पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ किसी भी प्रकार का शांति समझौता फिलहाल तय नहीं है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट में सैन्य नाकेबंदी और ईरान के रणनीतिक खार्ग द्वीप को लेकर भी कड़ी चेतावनी दी है।
दूसरी ओर, ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिकी हमलों का जवाब देना जारी रखेगा और क्षेत्र में अमेरिका का समर्थन करने वाले देशों को भी संभावित लक्ष्य माना जाएगा। रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में नौवहन गतिविधियों पर भी कड़े कदम उठाए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रही तो पश्चिम एशिया में व्यापक संघर्ष छिड़ सकता है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। हालांकि, खाड़ी देशों सहित कई राष्ट्र दोनों पक्षों से संयम बरतने और तत्काल युद्धविराम लागू करने की अपील कर रहे हैं।
महत्वपूर्ण: इस घटनाक्रम से जुड़ी कई जानकारियां अभी विभिन्न पक्षों के दावों और प्रारंभिक रिपोर्टों पर आधारित हैं। स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से सभी दावों की पूर्ण पुष्टि होना अभी बाकी है।
