राजस्थान से प्रधानमंत्री का बड़ा संदेश: ऊर्जा संकट में भारत की मजबूती, विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और आत्मनिर्भर भारत की नई उड़ान

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बालोतरा (राजस्थान)/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री ने शनिवार को राजस्थान के बालोतरा में आयोजित भव्य कार्यक्रम में देश को अनेक महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं समर्पित करते हुए कहा कि भारत ने वैश्विक ऊर्जा संकट, युद्ध और आपूर्ति बाधाओं के बीच भी अपने नागरिकों को राहत देने में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने दूरदर्शी नीतियों, मजबूत कूटनीति और त्वरित निर्णय क्षमता के बल पर देश को संकट से सुरक्षित निकालने का कार्य किया।

प्रधानमंत्री ने राजस्थान रिफाइनरी सहित कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करते हुए कहा कि यह केवल आधारभूत संरचना का विस्तार नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि नई रिफाइनरी हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न करेगी और राजस्थान की औद्योगिक प्रगति को नई गति देगी।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार केवल शिलान्यास तक सीमित नहीं रहती, बल्कि परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा कर जनता को समर्पित करती है। उन्होंने हाल ही में आई चुनौतियों के बावजूद रिकॉर्ड समय में कार्य पूर्ण होने को “नए भारत की कार्य संस्कृति” का उदाहरण बताया।

उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण विश्व ऊर्जा संकट उत्पन्न हुआ, लेकिन भारत ने रिफाइनरियों की उत्पादन क्षमता बढ़ाकर रसोई गैस (एलपीजी) की उपलब्धता सुनिश्चित की। संकट के दौरान देश में एलपीजी उत्पादन को लगभग 35 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 54 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन तक पहुंचाया गया। साथ ही लाखों परिवारों को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन उपलब्ध कराए गए, जिससे घरेलू गैस आपूर्ति पर दबाव कम हुआ।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ने दिया। उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को रियायती दर पर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए गए तथा पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती कर आम नागरिकों को राहत दी गई।

उन्होंने कहा कि भारत की मजबूत विदेश नीति के कारण संकट के समय ऊर्जा आयात करने वाले देशों की संख्या 25–26 से बढ़कर 40 से अधिक हो गई, जिससे देश में ईंधन की आपूर्ति निर्बाध बनी रही। उन्होंने इसे भारत की बढ़ती वैश्विक साख और प्रभावी कूटनीति का परिणाम बताया।

प्रधानमंत्री ने किसानों के हितों का उल्लेख करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतें कई गुना बढ़ने के बावजूद सरकार ने किसानों को सब्सिडी देकर लगभग 300 रुपये प्रति बोरी की दर से उर्वरक उपलब्ध कराया। इसके लिए केंद्र सरकार ने लाखों करोड़ रुपये की सब्सिडी वहन की।

उन्होंने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए अतिरिक्त ऋण सुविधा और सरकारी गारंटी का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन समय में उद्योगों और रोजगार की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही।

प्रधानमंत्री ने राजस्थान में जल संकट के समाधान के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि राजस्थान और हरियाणा के बीच सहमति से शेखावाटी क्षेत्र तक पानी पहुंचाने की महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 34 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त जल संरक्षण, नल से जल योजना तथा भूजल स्तर सुधारने के लिए व्यापक कार्य किए जा रहे हैं।

उन्होंने जयपुर मेट्रो फेज-2, जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल, उड़ान योजना के विस्तार तथा अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं को राजस्थान के आर्थिक विकास, पर्यटन और निवेश के लिए महत्वपूर्ण बताया।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि स्पष्ट नीयत, तेज निर्णय और जनता के विश्वास के बल पर कठिन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार मिलकर राजस्थान को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी तथा विकसित भारत के संकल्प को साकार करेगी।

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