नईदिल्ली/तेहरान/दुबई | दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि अमेरिका द्वारा लेबनान युद्धविराम समझौते की शर्तें पूरी नहीं किए जाने के कारण होर्मुज क्षेत्र में कड़े प्रतिबंध लागू किए जा रहे हैं और बिना अनुमति प्रवेश करने वाले जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है।
हालांकि इस घटनाक्रम के बीच ईरान के विदेश मंत्रालय ने अलग बयान जारी कर कहा कि जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद नहीं है और व्यावसायिक जहाजों की सीमित आवाजाही जारी है। इस विरोधाभासी स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों, तेल बाजार और वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
न्यूयॉर्क पोस्ट और एजेंसियों के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और गैस परिवहन होता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई या अवरोध का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। वर्तमान में क्षेत्र में बारूदी सुरंगों, सुरक्षा खतरों और सैन्य तनाव के कारण जहाजरानी पहले से ही प्रभावित है।
सूत्रों के अनुसार IRGC ने चेतावनी दी है कि लेबनान से संबंधित समझौते की शर्तों का पालन नहीं होने तक क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम बने रहेंगे। दूसरी ओर इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच जारी संघर्ष ने युद्धविराम की स्थिरता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
तेल बाजार में इस खबर के बाद अस्थिरता देखी गई है। निवेशकों को आशंका है कि यदि होर्मुज में स्थिति और बिगड़ती है तो कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल आ सकता है तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल यह पुष्टि नहीं हुई है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद कर दिया गया है। IRGC की चेतावनियों और ईरानी विदेश मंत्रालय के बयानों में अंतर दिखाई दे रहा है। इसलिए स्थिति को “पूर्ण बंदी” के बजाय “अत्यधिक तनाव और नियंत्रित आवाजाही” के रूप में देखा जा रहा है।
