फर्जी आंकड़े देने वाली दवा कंपनियों पर सख्ती, केंद्र सरकार ने अधिसूचित किए नए औषधि नियम

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नई दिल्ली, 6 अगस्त।(Pib)देश में दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में संशोधन अधिसूचित करते हुए ऐसे आवेदकों के खिलाफ कड़े प्रावधान लागू किए हैं, जो दवा संबंधी लाइसेंस या अनुमोदन के लिए फर्जी, मनगढ़ंत अथवा भ्रामक आंकड़े और दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं।
मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अब लाइसेंसिंग प्राधिकरण को यह अधिकार होगा कि यदि किसी संस्था द्वारा आवेदन के समर्थन में फर्जी या मनगढ़ंत वैज्ञानिक आंकड़े अथवा दस्तावेज प्रस्तुत किए जाते हैं, तो उसका आवेदन केवल अस्वीकार ही नहीं किया जाएगा, बल्कि निर्धारित अवधि तक उसके भविष्य के नए आवेदन भी स्वीकार नहीं किए जाएंगे। यह प्रावधान औषधि नियम, 1945 के अंतर्गत दायर सभी प्रकार के आवेदनों पर लागू होगा।
अब तक ऐसे मामलों में आवेदन निरस्त करने या मौजूदा लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई की जाती थी। नए संशोधन के बाद दोषी पाए जाने वाले आवेदकों पर अतिरिक्त नियामकीय प्रतिबंध लगाया जा सकेगा। हालांकि, किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से पहले संबंधित संस्था को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा तथा अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा। इसके साथ ही अपील करने का अधिकार भी उपलब्ध रहेगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि दवा निर्माण और अनुमोदन प्रक्रिया में प्रस्तुत किए जाने वाले वैज्ञानिक आंकड़े किसी भी औषधि की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता का आधार होते हैं। यदि इनमें फर्जी या मनगढ़ंत जानकारी दी जाती है तो इससे न केवल नियामकीय प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होती है, बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
सरकार का कहना है कि यह संशोधन औषधि क्षेत्र में जवाबदेही बढ़ाने, अनैतिक गतिविधियों पर रोक लगाने और भारत की दवा नियामक प्रणाली को वैश्विक सर्वोत्तम मानकों के अनुरूप मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे ईमानदारी से नियमों का पालन करने वाले दवा निर्माता और वितरकों को प्रोत्साहन मिलेगा, जबकि फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी। मंत्रालय के अनुसार यह निर्णय देश में सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

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