नई दिल्ली, 6 अगस्त।(पीईबी) केंद्र सरकार ने वैज्ञानिक अनुसंधान और दवा विकास में पारंपरिक पशु परीक्षण पर निर्भरता कम करने के लिए मानव-आधारित आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल तेज कर दी है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में बताया कि सरकार ऑर्गेन-ऑन-चिप, 3डी ऊतक (टिश्यू) मॉडल, स्टेम सेल, ऑर्गेनॉइड, सेल-आधारित तथा कम्प्यूटेशनल तकनीकों जैसे गैर-पशु मॉडलों के विकास और उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है।
उन्होंने बताया कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने देश के 71 संस्थानों में गैर-पशु परीक्षण विधियों से संबंधित 109 अनुसंधान परियोजनाओं को समर्थन दिया है। वहीं वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की आठ प्रयोगशालाएं उन्नत इन-विट्रो, ऑर्गेन-ऑन-चिप और कोशिका-आधारित प्रणालियों पर कार्य कर रही हैं।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के अंतर्गत बेंगलुरु स्थित बीआरआईसी-इनस्टेम और फरीदाबाद स्थित टीएचएसटीआई जैसे संस्थान अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में गैर-पशु मॉडल विकसित कर रहे हैं। इनस्टेम में प्रारंभिक भ्रूण मॉडल और ऑर्गेनॉइड तकनीक पर कार्य हो रहा है, जबकि टीएचएसटीआई ने दवा स्क्रीनिंग और यकृत रोगों के अध्ययन के लिए एक नया प्लेटफॉर्म विकसित किया है। हैदराबाद स्थित सीसीएमबी का प्रेडिक्टिव ह्यूमन मॉडल सिस्टम्स सेंटर भी मानव-आधारित परीक्षण प्रणालियों के विकास में सहयोग दे रहा है।
सरकार का कहना है कि फिलहाल ये तकनीकें पूरी तरह पशु परीक्षण का स्थान नहीं ले सकतीं, लेकिन दवा खोज, विषाक्तता मूल्यांकन और जैव चिकित्सा अनुसंधान में इनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। सरकार अनुसंधान, नवाचार, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता के माध्यम से इन तकनीकों का विस्तार कर रही है, ताकि भविष्य में अधिक सुरक्षित, तेज़ और मानव-प्रासंगिक वैज्ञानिक अनुसंधान संभव हो सके।
