इश्क करो पार्टी या कॉकरोच जनता पार्टी कौन बनेगा जनता का सारथी ? सियासत में नया रोमांस

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इश्क करो पार्टी , कॉकरोच नहीं? सियासत में नया रोमांस,युवा किसके साथ ?

नईदिल्ली| (मीडिया) देश की राजनीति इन दिनों किसी वेब सीरीज से कम नहीं लग रही। अभी लोग कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नाम पर हैरान होना बंद भी नहीं हुए थे कि पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज मार्कंडेय काटजू ने नई “इश्क करो पार्टी (IKP)” का ऐलान कर दिया। उनका संदेश है— “Make Love, Not War” यानी लड़ाई नहीं, इश्क करो।

लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल पार्टी का नाम बदलने से राजनीति बदल जाएगी?

देश की जनता वर्षों से देख रही है कि पार्टी कोई भी हो, चेहरे अक्सर वही रहते हैं। नेता आज इस दल में हैं, कल उस दल में दिखाई देते हैं। चुनाव आते ही विचारधारा से ज्यादा टिकट और समीकरण चर्चा में रहते हैं। ऐसे माहौल में जब कॉकरोच जनता पार्टी ने खुद को युवाओं की बेरोजगारी, परीक्षा घोटालों और व्यवस्था से नाराजगी की आवाज के रूप में पेश किया, तो बड़ी संख्या में युवाओं का ध्यान उसकी ओर गया।

कॉकरोच जनता पार्टी की खास बात यह रही कि शुरुआत भले व्यंग्य से हुई हो, लेकिन देखते-देखते यह सोशल मीडिया से निकलकर सड़कों तक पहुंच गई। हाल के दिनों में इसके आंदोलन, प्रेस कॉन्फ्रेंस और देशभर में विस्तार की रणनीति चर्चा का विषय बने हुए हैं। पार्टी के संयोजक अभिजीत दीपके ने आगे और शहरों में अभियान चलाने की बात भी कही है।

इधर इश्क करो पार्टी प्रेम, एकता और सामाजिक सौहार्द का संदेश दे रही है, वहीं कॉकरोच जनता पार्टी व्यवस्था से नाराज युवाओं की आवाज बनने की कोशिश कर रही है।

राजनीतिक गलियारों में मजाक भी चल रहा है कि जब पारंपरिक दलों से लोग ऊबने लगते हैं, तब कभी “कॉकरोच” तो कभी “इश्क” राजनीति का नया ब्रांड बन जाता है। लेकिन फिलहाल सोशल मीडिया के ट्रेंड और युवाओं की सक्रियता को देखें तो कॉकरोच जनता पार्टी चर्चा और लोकप्रियता में आगे नजर आ रही है।

कह सकते हैं कि देश की राजनीति में अब मुकाबला केवल विचारधाराओं का नहीं, बल्कि नामों और नारों का भी है। एक तरफ संदेश है— “इश्क करो”, दूसरी तरफ नारा है— “कॉकरोच भी जनता है।” अब जनता किसे चुनती है, यह आने वाला समय बताएगा।

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