“डॉलर बनाम गोल्ड की जंग,डिजिटल करेंसी?”
पेरिस/वॉशिंगटन/नई दिल्ली।
दुनिया की आर्थिक महाशक्ति माने जाने वाले अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका फ्रांस ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व में वर्षों से सुरक्षित रखा अपना शेष स्वर्ण भंडार वापस यूरोप स्थानांतरित कर लिया। इस घटनाक्रम ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में हलचल पैदा कर दी है कि क्या दुनिया अब धीरे-धीरे डॉलर आधारित आर्थिक व्यवस्था से दूरी बनाने लगी है।
हालांकि फ्रांस की केंद्रीय बैंकिंग संस्था ने इसे तकनीकी और वित्तीय प्रक्रिया बताया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विशेषज्ञ इसे बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन का संकेत मान रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिमी प्रतिबंधों, वैश्विक व्यापार तनाव और डॉलर पर बढ़ती निर्भरता को लेकर कई देशों की चिंता अब खुलकर सामने आने लगी है।
जानकारों के अनुसार फ्रांस के पास लगभग 2400 टन से अधिक स्वर्ण भंडार है, जिसमें से एक हिस्सा दशकों से न्यूयॉर्क स्थित अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक में रखा गया था। अब फ्रांस ने अपने शेष गोल्ड रिजर्व को भी पेरिस लाकर घरेलू नियंत्रण में सुरक्षित कर लिया है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल फ्रांस तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ वर्षों से चीन, रूस, तुर्किये और कई अन्य देशों ने भी अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ाने और विदेशी मुद्रा जोखिम कम करने की दिशा में रणनीति अपना चुके है। दुनिया के केंद्रीय बैंकों द्वारा रिकॉर्ड स्तर पर सोने की खरीद को इसी बदलती सोच से जोड़कर देखा जा रहा है।
भारत के लिए क्यों अहम?
भारत जैसे उभरते आर्थिक शक्ति के लिए यह घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक भी बीते वर्षों में लगातार सोने का भंडार बढ़ा रहा है। वैश्विक अस्थिरता, युद्ध जैसे हालात और डॉलर में उतार-चढ़ाव के बीच सोना एक बार फिर आर्थिक सुरक्षा कवच के रूप में उभर रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में दुनिया “मल्टी-पोलर इकोनॉमिक सिस्टम” की ओर बढ़ सकती है, जहां केवल डॉलर ही नहीं बल्कि सोना, स्थानीय मुद्राएं और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियां भी वैश्विक व्यापार में बड़ी भूमिका निभाएंगी।
बाजार पर क्या असर?
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इस खबर के बाद निवेशकों के बीच सुरक्षित निवेश विकल्पों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि केवल फ्रांस के इस कदम से सोने की कीमतों में अचानक बड़ा बदलाव तय नहीं माना जा सकता, लेकिन यह घटनाक्रम वैश्विक निवेश पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है।
दुनिया को मिला बड़ा संदेश
फ्रांस का यह फैसला साफ संकेत देता है कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था अब बदलाव के दौर में प्रवेश कर चुकी है। डिजिटल अर्थ व्यवस्था ,दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अब अपने रणनीतिक संसाधनों पर प्रत्यक्ष नियंत्रण चाहती हैं। ऐसे में आने वाले समय में सोना केवल आभूषण या निवेश नहीं, बल्कि आर्थिक और भू-राजनीतिक शक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक बनकर उभर सकता है।
