नई दिल्ली | नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेस एक्ट (NDPS Act) के तहत एक बेहद अहम और दूरगामी असर वाला फैसला सुनाते हुए ने स्पष्ट कर दिया है कि गांजे के पत्ते और डंठल को ‘गांजा’ नहीं माना जा सकता। कोर्ट के इस रुख ने ड्रग्स मामलों में ‘कमर्शियल मात्रा’ तय करने की प्रक्रिया पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मामले में आरोपी को ज़मानत देते हुए अदालत ने कहा कि NDPS एक्ट के तहत ‘गांजा’ की परिभाषा सिर्फ पौधे के फूल या फल वाले ऊपरी हिस्सों (flowering/fruiting tops) तक सीमित है। यदि ज़ब्त सामग्री में पत्ते, बीज या डंठल शामिल हैं, तो उन्हें तब तक ‘गांजा’ नहीं माना जाएगा, जब तक वे इन ऊपरी हिस्सों के साथ स्पष्ट रूप से जुड़े न हों। 21.95 किलो जब्ती पर भी संदेह सरकारी पक्ष ने 21.95 किलोग्राम जब्त सामग्री को ‘कमर्शियल मात्रा’ (20 किलो+) बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन कोर्ट ने ज़ब्ती मेमो में दर्ज “सूखे पत्ते और छोटी डालियों” का हवाला देते हुए कहा कि असल नशीले हिस्से का वजन स्पष्ट नहीं है, इसलिए कमर्शियल मात्रा मानने पर संदेह बनता है। ‘रवीना कुमारी केस’ बना आधार अदालत ने अपने ही पुराने फैसले का हवाला देते हुए समझाया कि: अगर ज़ब्त सामग्री मिश्रित है (फूल+पत्ते+डंठल), तो सिर्फ नशीले हिस्से (फूल/फल वाले भाग) का ही वजन माना जाएगा, बाकी “बेकार सामग्री” (placebo) नहीं। क्या बदल जाएगा अब? यह फैसला NDPS मामलों में एक गेम चेंजर साबित हो सकता है— अब सिर्फ कुल वजन के आधार पर ‘कमर्शियल मात्रा’ तय करना मुश्किल होगा जांच एजेंसियों को सटीक विश्लेषण करना होगा कई आरोपियों को राहत मिलने की संभावना बढ़ी बड़ा संदेश कोर्ट ने साफ कर दिया— कानून की सख्ती तभी लागू होगी, जब असली नशीले पदार्थ की मात्रा साबित हो केवल पत्तों और डंठलों के आधार पर किसी को ‘बड़ा तस्कर’ नहीं ठहराया जा सकता NDPS एक्ट के तहत यह फैसला सिर्फ एक ज़मानत नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को नई दिशा देने वाला कानूनी मोड़ माना जा रहा है। आने वाले समय में ड्रग्स मामलों की जांच और अदालतों की सुनवाई पर इसका गहरा असर दिख सकता है।

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