नई दिल्ली/(एजेंसी) तेहरान: ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित रणनीतिक रूप से अहम चाबहार फ्री ट्रेड ज़ोन पर अमेरिकी लड़ाकू विमानों के हमले की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है।मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चाबहार के पास पहाड़ी क्षेत्र में मौजूद सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिससे यह संवेदनशील क्षेत्र एक बार फिर वैश्विक तनाव का केंद्र बन गया है।
चाबहार बंदरगाह भारत के लिए सिर्फ एक पोर्ट नहीं, बल्कि अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का रणनीतिक दरवाजा है। भारत ने इस परियोजना में भारी निवेश कर पाकिस्तान को बायपास करते हुए व्यापार का नया मार्ग तैयार किया था। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां भारत की आर्थिक और कूटनीतिक रणनीति के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव बढ़ता है, तो चाबहार के जरिए होने वाला व्यापार बाधित हो सकता है। इससे भारत की सप्लाई चेन पर असर पड़ेगा, लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ेगी और निर्यात महंगा हो सकता है। इतना ही नहीं, इस परियोजना में लगे निवेश और भविष्य की योजनाओं पर भी अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।
चीन के ग्वादर पोर्ट के मुकाबले चाबहार भारत के लिए एक मजबूत विकल्प माना जाता रहा है। लेकिन मौजूदा हालात में यह बढ़त कमजोर पड़ती दिख रही है। वहीं, मध्य एशिया से ऊर्जा आपूर्ति और कच्चे माल के आयात पर भी इसका असर पड़ सकता है।
फिलहाल भारत सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है और कूटनीतिक स्तर पर संतुलन साधने की कोशिश कर रही है। लेकिन अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो चाबहार से जुड़े भारत के व्यापारिक सपनों को बड़ा झटका लग सकता है।
