भारत की एआई आत्मनिर्भरता को नई मजबूती

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योटा के सॉवरेन क्लाउड पर भाषिनी की सफल तैनाती, भारत की एआई आत्मनिर्भरता को नई मजबूती

नई दिल्ली।
भारत की अग्रणी सॉवरेन क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्लेटफॉर्म सेवा प्रदाता कंपनी योटा डेटा सर्विसेज ने गवर्नमेंट कम्युनिटी क्लाउड (GCC) और शक्ति क्लाउड पर भाषिनी के संपूर्ण सॉवरेन एआई क्लाउड रूपांतरण की सफल तैनाती की घोषणा की है। यह उपलब्धि इंडियाएआई मिशन के उद्देश्यों के अनुरूप है और आत्मनिर्भर, सुरक्षित व स्केलेबल एआई क्षमताओं की दिशा में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस बदलाव के साथ भाषिनी अब पूरी तरह भारतीय क्लाउड और जीपीयू इन्फ्रास्ट्रक्चर पर संचालित होगी, जिससे भाषा डेटा, मॉडल और नागरिकों की डिजिटल अंतःक्रियाएं देश के अधिकार क्षेत्र में सुरक्षित रहेंगी।

यह उपलब्धि ‘द इंडिया एआई सॉवरेनिटी डायलॉग्स’ में प्रदर्शित की गई, जो एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आधिकारिक प्री-समिट कार्यक्रम था। योटा और डिजिटल इंडिया के भाषिनी डिवीजन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में जारी ‘सॉवरेन एआई क्लाउड ट्रांसफॉर्मेशन रिपोर्ट’ में महाकुंभ 2025 के दौरान वास्तविक तैनाती के अनुभवों का भी उल्लेख किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, योटा के एनवीडिया एच100-सक्षम शक्ति क्लाउड पर संचालित भाषिनी ने 11 से अधिक भारतीय भाषाओं में वास्तविक समय अनुवाद और ध्वनि-आधारित सहायता प्रदान की, जिसमें बहुभाषी सहायक ‘कुंभ सह’एआई’यक’ भी शामिल रहा।

परियोजना से यह सिद्ध हुआ है कि राष्ट्रीय डिजिटल सार्वजनिक संसाधनों को हाइपरस्केलर वातावरण से स्वदेशी क्लाउड में स्थानांतरित किया जा सकता है। माइग्रेशन के बाद प्रदर्शन में 40 प्रतिशत तक सुधार, लागत में 20 से 30 प्रतिशत की बचत और 99.99 प्रतिशत अपटाइम प्राप्त हुआ। 200 टीआईबी से अधिक डेटा और 3.5 बिलियन से ज्यादा फाइलों का स्थानांतरण शून्य डेटा हानि के साथ पूरा किया गया।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव एवं इंडियाएआई मिशन के सीईओ अभिषेक सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत सार्वजनिक हित के लिए अपने सॉवरेन एआई सिस्टम का निर्माण, विस्तार और सुरक्षा करने में सक्षम है। वहीं, डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन के सीईओ अमिताभ नाग ने इसे भारत की भाषाई विविधता को सशक्त करने वाला कदम बताते हुए कहा कि यह परिवर्तन भविष्य की एआई तैनातियों के लिए एक मजबूत खाका बनेगा।

इंडियाएआई मिशन की सीईओ कविता भाटिया के अनुसार, पूरी तरह सॉवरेन एआई क्लाउड में भाषिनी का रूपांतरण जनसंख्या स्तर पर एआई विकसित करने की दिशा में एक बड़ी सफलता है। योटा डेटा सर्विसेज के सह-संस्थापक एवं सीईओ सुनील गुप्ता ने इसे भारत की डेटा यात्रा में निर्णायक मोड़ बताते हुए कहा कि यह परियोजना यह प्रमाणित करती है कि मिशन-क्रिटिकल एआई प्लेटफॉर्म पूरी तरह स्वदेशी बुनियादी ढांचे पर सफलतापूर्वक संचालित किए जा सकते हैं।

दो से तीन महीनों में पूरा हुआ यह माइग्रेशन एक मॉड्यूलर और पुन: प्रयोज्य ढांचे पर आधारित है, जिसे मंत्रालयों, सार्वजनिक उपक्रमों और बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रमों में अपनाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत को सुरक्षित, समावेशी और सॉवरेन एआई सार्वजनिक उपयोगिता के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

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