अजमेर। सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह की नगरी अजमेर एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गई है। शुक्रवार को दरगाह के मुख्य द्वार से मुस्लिम एकता मंच के तत्वावधान में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समाज के लोगों की संयुक्त रैली निकाली गई, जिसमें गाय को राष्ट्रीय दर्जा दिए जाने और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का संदेश दिया गया। रैली का नेतृत्व दरगाह के शाही इमाम एवं शहर काजी मौलाना तौसीफ अहमद सिद्दीकी ने किया।
दिल्ली गेट पर आयोजित सभा में विभिन्न धर्मों और समाजों के प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया। वक्ताओं ने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र रही है तथा उसका सम्मान देश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा विषय है।
रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा गया। सभा को आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़, पूर्व मंत्री नसीम अख्तर इंसाफ, डॉ. राजकुमार जयपाल, राष्ट्रीय संत गणेश महाराज, डॉ. गोपाल बाहेती, महेंद्र बंसल , मंसूरी सामाज के अध्यक्ष रियाज अहमद मंसूरी सहित अनेक सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने इसे किसी एक समुदाय का नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता का अभियान बताया।
इसी बीच, इस मांग के साथ अजमेर निवासी बाबू खान पुत्र मदन खान द्वारा प्रधानमंत्री को लिखा गया एक पुराना पत्र भारतीय सुभाष सेना के ब्रिगेडियर महेंद्र आर्य ने खबर वन को उपलब्ध कराया है। पत्र में बाबू खान ने गौवध पर पूर्ण प्रतिबंध, गोमांस निर्यात बंद करने तथा गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की थी। उन्होंने गाय को भारतीय संस्कृति और पूर्वजों की आस्था का प्रतीक बताते हुए गोवंश संरक्षण के लिए कठोर कानून बनाने की अपील की थी।

रियाज अहमद मंसूरी ने बताया कि दरगाह से निकली सर्वधर्म रैली और वर्षों पुराने इस पत्र का एक साथ सामने आना इस बात का संकेत है कि गाय को राष्ट्रीय दर्जा देने की मांग केवल किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि समय-समय पर विभिन्न समुदायों और सामाजिक संगठनों द्वारा मांग की जाती रही है।
रैली शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। उपस्थित लोगों ने राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और पारस्परिक सम्मान को मजबूत करने का संकल्प भी लिया।

