नेपाल की जलप्रलय से भारत की सीमा पर दस्तक, बिहार हाई अलर्ट

Spread the love

गंडक के सभी 36 गेट खुले, यूपी तक बढ़ी चिंता; हिमालयी तबाही का पानी अब मैदानों में

नई दिल्ली/पटना, 27 अगस्त।
नेपाल-तिब्बत सीमा पर प्रकृति ने जो कहर बरपाया है, उसकी गूंज अब भारत के मैदानी इलाकों तक सुनाई देने लगी है। नेपाल में ग्लेशियर से जुड़े भारी मलबे और पानी के अचानक नदी में आने से आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जान-माल को नुकसान पहुंचाया है। अब चिंता का केंद्र भारत है—खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश। नेपाल से आने वाले पानी ने गंडक नदी का दबाव बढ़ा दिया है और बिहार के वाल्मीकिनगर गंडक बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं।

नेपाल में हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग लापता हैं। बाढ़ और मलबे ने सड़क, पुल, बस्तियों तथा अन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। राहत और बचाव अभियान जारी है।

पहाड़ों का पानी अब मैदानों की चिंता

नेपाल की पहाड़ियों में जब पानी और मलबा बेकाबू होता है तो उसका रास्ता आखिरकार भारत की नदियों से होकर मैदानों की ओर आता है। यही कारण है कि बिहार प्रशासन की चिंता केवल नेपाल की खबर सुनने तक सीमित नहीं है। गंडक में पानी के प्रवाह और तटबंधों की स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है। संवेदनशील इलाकों में प्रशासन को आवश्यक सामग्री तैयार रखने, तटबंधों की जांच करने और लोगों को समय पर चेतावनी देने के निर्देश दिए गए हैं।

इन जिलों पर सबसे ज्यादा नजर

गंडक के बढ़ते जलस्तर का असर परिस्थिति के अनुसार पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर और आसपास के निचले इलाकों में पड़ सकता है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी है।

उत्तर प्रदेश में भी महराजगंज और कुशीनगर सहित नेपाल सीमा से जुड़े इलाकों पर नजर है। मुख्यमंत्री स्तर से भी संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के निर्देश दिए गए हैं।

असली डर अभी बाकी—दूसरी बाढ़ का खतरा

सबसे बड़ी चिंता यह है कि नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में भारी मलबे और पानी से नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हुआ है। विशेषज्ञों ने वहां दूसरी फ्लैश फ्लड की संभावना से इनकार नहीं किया है। यदि कोई प्राकृतिक अवरोध अचानक टूटता है तो पानी और मलबे का तेज बहाव फिर नीचे की ओर जा सकता है।

यानी पहाड़ में मची तबाही का एक अध्याय खत्म हुआ हो, ऐसा मान लेना अभी जल्दबाजी होगी। नदी का पानी कम होने तक खतरे की निगरानी जरूरी रहेगी।

केंद्र सतर्क, NDRF तैयार

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र ने बिहार और उत्तर प्रदेश के साथ समन्वय बढ़ाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात की है और आपदा प्रबंधन तंत्र को सतर्क रखा गया है। NDRF की टीमें भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।

राजस्थान के लिए क्या?

फिलहाल नेपाल की इस बाढ़ का राजस्थान पर सीधा बाढ़ का खतरा नहीं है। नेपाल से आने वाली प्रमुख नदियों का जलप्रवाह बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर जाता है। इसलिए राजस्थान में नेपाल की बाढ़ का पानी पहुंचने की बात फिलहाल तथ्यात्मक आधार पर नहीं कही जा सकती।

खतरा नेपाल में नहीं रुका, अब निगाह नदी पर

नेपाल की त्रासदी ने एक बार फिर हिमालय और उससे निकलने वाली नदियों की ताकत का एहसास करा दिया है। पहाड़ों में अचानक हुई प्राकृतिक घटना कुछ ही घंटों में मैदानों की प्रशासनिक व्यवस्था के सामने चुनौती बन सकती है। फिलहाल बिहार सबसे संवेदनशील मोर्चा है और गंडक नदी सबसे महत्वपूर्ण निगरानी बिंदु।

अब सवाल यह नहीं कि नेपाल में कितना पानी आया—सवाल यह है कि भारत की ओर आने वाला पानी कितना बढ़ता है, किस गति से बढ़ता है और उसके रास्ते में आने वाले तटबंध उसे कितना संभाल पाते हैं। यही आने वाले घंटों में बिहार की असली परीक्षा होगी।

स्रोत: Reuters, AP, India Today, Times of India एवं अन्य ताजा रिपोर्टें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *