
परिजनों ने लगाया इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप, सूत्रों के हवाले से गलत इंजेक्शन,गलत ब्लड चढ़ाए जाने की भी चर्चा; मां और नवजात की मौत के दावे ने बढ़ाई चिंता, जांच की मांग
रीवा। संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में प्रसव के दौरान गर्भवती महिला कल्पना मिश्रा, पुत्री राम शिरोमणि मिश्रा, की मौत के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। पहली डिलीवरी के लिए अस्पताल पहुंची कल्पना की मौत के बाद परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल के मुख्य द्वार पर बैठकर विरोध जताते हुए जिम्मेदार चिकित्सकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।परिजनों के मुताबिक कल्पना को मंगलवार को प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार का आरोप है कि उपचार के दौरान उसकी हालत बिगड़ती रही और चिकित्सकों से बार-बार ध्यान देने की गुहार लगाने के बावजूद स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसी बीच महिला की हालत ऐसी हो गई कि वह वार्ड से बाहर आकर अपनी मां से रोते हुए मदद मांगने लगी। उसकी कही बात—“मां, मुझे बचा लीजिए… मैं नहीं बचूंगी”—अब इस पूरे मामले की सबसे दर्दनाक कड़ी बन गई है।परिजनों का आरोप है कि समय रहते समुचित उपचार और निगरानी मिलती तो शायद कल्पना की जान बचाई जा सकती थी। गुरुवार को उसकी मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया। अस्पताल के मुख्य द्वार पर बैठकर परिजनों ने विरोध दर्ज कराया और मामले की निष्पक्ष जांच के साथ दोषी पाए जाने वाले चिकित्सकों एवं कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
गलत इंजेक्शन,ब्लड चढ़ाने की भी सामने आई चर्चा
इसी बीच सूत्रों के हवाले से एक बेहद गंभीर दावा सामने आया है कि उपचार के दौरान कथित रूप से गलत ब्लड चढ़ाए जाने के कारण मां और उसके शिशु की असमय मौत हुई। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो मामला बेहद गंभीर माना जाएगा और अस्पताल की ब्लड ट्रांसफ्यूजन व्यवस्था से लेकर उपचार प्रक्रिया तक कई स्तरों पर जवाबदेही तय करनी पड़ सकती है।ऐसे गंभीर आरोपों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कल्पना की मौत की वास्तविक वजह क्या थी और उपचार के दौरान आखिर कौन-कौन से चिकित्सकीय कदम उठाए गए? पूरे घटनाक्रम की मेडिकल जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड की निष्पक्ष समीक्षा से ही सच्चाई सामने आ सकती है।
अस्पताल प्रबंधन ने लापरवाही से किया इनकार
मामले में अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही से इनकार किया है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार महिला का उपचार निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत किया गया। परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की जानकारी ली जा रही है।लेकिन सवाल अब सिर्फ एक परिवार का नहीं रह गया है। यदि परिजनों के आरोपों में सच्चाई है तो इसकी जवाबदेही तय होना जरूरी है और यदि आरोप तथ्यहीन हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए।एक सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले प्रत्येक मरीज के जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। कल्पना अस्पताल में पहली बार मां बनने की उम्मीद लेकर पहुंची थी, लेकिन परिवार को उसकी जिंदगी के बजाय उसकी मौत की खबर मिली। परिजनों का दर्द और अस्पताल की व्यवस्था पर उठते सवाल अब प्रशासन के सामने हैं।इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच ही तय करेगी कि मौत के पीछे बीमारी और चिकित्सकीय जटिलता थी या उपचार के दौरान कोई गंभीर चूक।
