पेड न्यूज पर चुनाव आयोग की सख्ती, हर संदिग्ध खबर की होगी निगरानी

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राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को जारी किए विस्तृत निर्देश, एमएमसी करेगी मामलों की जांच

जयपुर। राजस्थान में नगरपालिका एवं पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों और अभ्यर्थियों द्वारा मीडिया के माध्यम से अनुचित चुनावी लाभ लेने की कोशिशों पर राज्य निर्वाचन आयोग ने निगरानी कड़ी कर दी है। राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान की ओर से 27 अगस्त 2026 को जारी पत्र में चुनाव के दौरान पेड न्यूज की पहचान, जांच और निगरानी के लिए जिला एवं राज्य स्तर पर मीडिया मॉनिटरिंग कमेटियों (MMC) के गठन और उनकी भूमिका स्पष्ट की गई है।

आयोग के निर्देश के अनुसार समाचार पत्रों, टीवी, केबल, रेडियो, इंटरनेट तथा प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रसारित होने वाली ऐसी सामग्री पर नजर रखी जाएगी, जो किसी राजनीतिक दल या अभ्यर्थी के पक्ष में चुनावी लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से प्रकाशित या प्रसारित की गई हो। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ऐसी सामग्री को सामान्य समाचार मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

जिले में बनेगी मीडिया मॉनिटरिंग कमेटी

निर्देशों के मुताबिक प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय मीडिया मॉनिटरिंग कमेटी (MMC) गठित की जाएगी। इसके अध्यक्ष जिला निर्वाचन अधिकारी होंगे। समिति में जिला स्तर पर पदस्थापित राजस्थान प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी तथा जिला जनसंपर्क अधिकारी को सदस्य और सदस्य सचिव की जिम्मेदारी दी गई है।

जिले में एक अलग मीडिया प्रकोष्ठ भी बनाया जाएगा। यह प्रकोष्ठ समाचार पत्र-पत्रिकाओं की कटिंग मंगाने, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रसारित सामग्री की निगरानी करने और संदिग्ध पेड न्यूज के मामलों को संबंधित समिति के सामने रखने का काम करेगा।

संदिग्ध खबर मिलने पर अभ्यर्थी को नोटिस

आयोग ने पेड न्यूज के मामलों की जांच के लिए निर्धारित प्रक्रिया भी तय की है। संदिग्ध पेड न्यूज की पहचान के बाद जिला स्तरीय MMC उसका प्रारंभिक परीक्षण करेगी। यदि समिति को प्रथम दृष्टया मामला पेड न्यूज का प्रतीत होता है तो संबंधित रिटर्निंग अधिकारी को अभ्यर्थी को नोटिस जारी करने के लिए मामला भेजा जाएगा।

नोटिस मिलने के बाद अभ्यर्थी को 48 घंटे के भीतर जवाब देना होगा। जवाब नहीं मिलने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत मामला आगे बढ़ाया जाएगा। यदि अभ्यर्थी स्वयं खबर को पेड न्यूज मान लेता है तो उसकी लागत डीपीआर/डीपीआरओ की दरों के आधार पर निर्धारित कर चुनाव व्यय खाते में जोड़ी जाएगी।

खबर की लागत भी चुनाव खर्च में जुड़ेगी

आयोग के निर्देशों में खास बात यह है कि पेड न्यूज साबित होने पर केवल खबर को चिन्हित करने तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। जिला स्तरीय MMC संबंधित पेड न्यूज की लागत निर्धारित करेगी और उसे अभ्यर्थी के चुनाव व्यय खाते में जोड़ा जाएगा।

लागत निर्धारण के लिए डीपीआर की दरों को आधार बनाया जाएगा। यदि किसी सामग्री की दर उपलब्ध नहीं है तो डीपीआरओ की दरों के आधार पर लागत तय की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि संबंधित समाचार किस पृष्ठ पर प्रकाशित हुआ, उसकी कवरेज कितनी थी और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कितने समय तक प्रसारित हुआ।

48 घंटे में राज्य स्तरीय समिति में अपील

जिला स्तरीय MMC के निर्णय के खिलाफ संबंधित अभ्यर्थी को मुख्य निर्वाचन अधिकारी की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय MMC के समक्ष 48 घंटे के भीतर अपील करने का अवसर मिलेगा। आयोग के निर्देश के अनुसार राज्य स्तरीय समिति में मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं सचिव अध्यक्ष, वरिष्ठ लेखाधिकारी सदस्य तथा जनसंपर्क अधिकारी सदस्य सचिव होंगे।

हर मामले का रिकॉर्ड रखने के निर्देश

आयोग ने पेड न्यूज से जुड़े मामलों के लिए एक निर्धारित रजिस्टर रखने का भी निर्देश दिया है। इसमें संदिग्ध खबर प्राप्त होने की तारीख, स्रोत, समाचार पत्र/चैनल का नाम, प्रकाशन या प्रसारण की तारीख, जिला स्तरीय MMC की कार्रवाई, अभ्यर्थी को भेजे गए नोटिस, जवाब, निर्णय, निर्धारित लागत और अपील सहित पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड दर्ज किया जाएगा।

आयोग के इस आदेश का सीधा संदेश है कि चुनावी मैदान में प्रचार और समाचार के बीच की सीमा पर नजर रहेगी। समाचार के रूप में प्रचार कराने की कोशिश हुई तो उसकी निगरानी, जांच और संभावित खर्च को चुनावी हिसाब-किताब में शामिल किया जा सकता है।

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