नईदिल्ली/पटना , 26 जुलाई |NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर बिहार में शुरू हुआ आंदोलन अब राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले चुका है। जनशक्ति जनता दल (JJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव को पटना की अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। उन्हें 25 जुलाई को पटना में छात्रों के प्रदर्शन में शामिल होने के बाद पुलिस ने पहले हिरासत में लिया और बाद में गिरफ्तार किया था। अदालत के आदेश के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
राम गुलाम चौक पर छात्रों के बीच पहुंचे थे तेज प्रताप
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 25 जुलाई को बिहार बंद के दौरान तेज प्रताप यादव पटना के राम गुलाम चौक, गांधी मैदान क्षेत्र में NEET-UG विवाद को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच पहुंचे थे। उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में अपनी बात रखी और आंदोलन को समर्थन दिया। इसके कुछ समय बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और पुलिस वाहन से वहां से ले गई। बाद की रिपोर्टों में उनके गिरफ्तार किए जाने और अदालत में पेश किए जाने की जानकारी सामने आई।
प्रदर्शन के दौरान तनाव और पुलिस से टकराव
25 जुलाई को बिहार बंद के दौरान पटना सहित राज्य के कुछ हिस्सों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की खबरें सामने आईं। पटना में प्रदर्शन के दौरान पथराव की घटनाओं की भी रिपोर्ट हुई। कुछ अन्य जिलों में भी प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बीच तनाव की स्थिति बनी। हालांकि, राज्य के सभी हिस्सों में बंद का प्रभाव एक जैसा नहीं रहा।
पुलिस की कार्रवाई का संबंध प्रदर्शन के दौरान कथित हिंसा और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की घटनाओं से बताया गया है। तेज प्रताप यादव के खिलाफ दर्ज मामले में पुलिस के आरोपों और मामले की धाराओं का अंतिम स्वरूप न्यायिक रिकॉर्ड से ही निर्णायक रूप से स्पष्ट होगा। उपलब्ध रिपोर्टों में उनके वकील की ओर से गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाने और जमानत याचिका दाखिल करने की संभावना की बात भी कही गई है।
अदालत का फैसला: 14 दिन की न्यायिक हिरासत
गिरफ्तारी के बाद तेज प्रताप यादव को अदालत में पेश किया गया। 26 जुलाई को अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। रिपोर्टों के अनुसार उन्हें बेउर केंद्रीय जेल भेजे जाने की जानकारी है। उनके अधिवक्ता जगन्नाथ सिंह ने जमानत की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि न्यायिक हिरासत किसी व्यक्ति के दोषी साबित होने का अर्थ नहीं है। इसका मतलब है कि अदालत के आदेश के तहत आरोपी को न्यायिक हिरासत में रखा गया है। मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रहेगी तथा दोष या निर्दोषता का फैसला अदालत में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।
NEET-UG विवाद ने पकड़ा राजनीतिक रंग
तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों का आक्रोश बिहार में व्यापक विरोध का रूप ले चुका है। 25 जुलाई को बिहार बंद का आह्वान भी इसी विवाद और छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध से जुड़ा था। पटना सहित कई स्थानों पर प्रदर्शन हुए और कुछ जगहों पर पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी।
तेज प्रताप यादव के प्रदर्शन में शामिल होने और उसके बाद गिरफ्तारी ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रूप से और महत्वपूर्ण बना दिया है। एक ओर पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपनी कार्रवाई को उचित ठहरा रही है, वहीं दूसरी ओर तेज प्रताप के समर्थकों और उनके वकील की ओर से कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। इन दावों पर अंतिम स्थिति जांच और अदालत की आगामी कार्यवाही से स्पष्ट होगी।
अब नजर जमानत पर
तेज प्रताप यादव को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद अब उनकी कानूनी टीम की अगली रणनीति पर नजर है। उनके वकील की ओर से जमानत के लिए अदालत का रुख किए जाने की बात सामने आई है। इस बीच NEET-UG विवाद और छात्रों के आंदोलन को लेकर बिहार में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहने की संभावना है।
फिलहाल स्थिति यह है कि तेज प्रताप यादव 25 जुलाई की पुलिस कार्रवाई के बाद गिरफ्तार किए गए और 26 जुलाई को अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। उनके खिलाफ लगे आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और उन्हें दोषी ठहराया नहीं गया है।
यह रिपोर्ट 26 जुलाई 2026 तक उपलब्ध The Indian Express, India Today, NDTV/PTI, The New Indian Express और Times of India की प्रकाशित रिपोर्टों के क्रॉस-चेक पर आधारित है।
