कैंसर पीड़ित 77 वर्षीय बुजुर्ग की पेंशन याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, हाईकोर्ट को शीघ्र सुनवाई के निर्देश

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लंबित मामलों में देरी पर टिप्पणी, सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने को कहा

नई दिल्ली। Supreme Court of India ने एक 77 वर्षीय कैंसर पीड़ित व्यक्ति की लंबित पेंशन याचिका पर संज्ञान लेते हुए Allahabad High Court को मामले की आउट-ऑफ-टर्न सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि मामले को सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति Justice Surya Kant और न्यायमूर्ति Justice Joymalya Bagchi की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया। अदालत ने याचिकाकर्ता की आयु और गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए शीघ्र निपटारे की आवश्यकता पर बल दिया।
मामले का विवरण
याचिकाकर्ता ने 1 जून 1970 से 28 मई 1985 तक उत्तर प्रदेश सरकार में सेवा दी थी। इसके बाद उन्होंने इस्तीफा देकर Gas Authority of India Limited (GAIL) में कार्यभार ग्रहण किया। उनका दावा है कि राज्य सेवा छोड़ने के बावजूद वे यूपी सिविल सेवा विनियमों, विशेष रूप से विनियम 418(b), के तहत पेंशन एवं सेवानिवृत्ति लाभ के हकदार हैं।
हालांकि, राज्य सरकार ने विनियम 418(a) का हवाला देते हुए उनके दावे को अस्वीकार कर दिया। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने वर्ष 2017 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन लगभग नौ वर्षों के बाद भी मामले का अंतिम निपटारा नहीं हो सका।
याचिका में उठाए गए मुद्दे
याचिका में कहा गया है कि “पेंशन कोई दया नहीं, बल्कि कर्मचारी का अधिकार है,” और इसे Article 21 of the Constitution of India के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा बताया गया है। साथ ही, लंबे समय तक सुनवाई न होने को Article 14 of the Constitution of India और अनुच्छेद 21 के उल्लंघन के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
अदालत की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में, विशेषकर जब याचिकाकर्ता वृद्ध और गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो, न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। अदालत ने हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह मामले की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई कर यथाशीघ्र उचित निर्णय दे।

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