शिक्षा विभाग में RTI कैसे लगाएं? 312वें राष्ट्रीय वेबीनार में विशेषज्ञों ने बताए प्रभावी तरीके

Spread the love

नईदिल्ली//भोपाल/रीवा|
शिक्षा विभाग में सूचना का अधिकार (RTI) कानून के प्रभावी उपयोग और इससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को लेकर रविवार को 312वें राष्ट्रीय आरटीआई वेबीनार का आयोजन किया गया। ऑनलाइन आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के सूचना आयुक्तों, आरटीआई विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आरटीआई के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने किया। वेबीनार में ग्वालियर के आरटीआई कार्यकर्ता राज तिवारी, छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल, झारखंड से सुनील खंडेलवाल, राजगढ़ से जयपाल सिंह खींची सहित अनेक विशेषज्ञ और कार्यकर्ता शामिल हुए।

शिक्षा विभाग में आरटीआई की भूमिका

मुख्य वक्ता के रूप में उत्तराखंड के कंप्यूटर साइंस एवं टेक्नोलॉजी प्रोफेसर तथा आरटीआई रिसोर्स पर्सन वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने प्रस्तुति देते हुए बताया कि सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से आरटीआई के माध्यम से अनेक महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि निजी शैक्षणिक संस्थानों से सीधे जानकारी प्राप्त करने की कुछ सीमाएं अवश्य हैं, लेकिन उनसे संबंधित सूचनाएं विभिन्न सरकारी विभागों के माध्यम से हासिल की जा सकती हैं।

उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अपनी उत्तर पुस्तिकाओं, अंकतालिकाओं और शैक्षणिक रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी भी आरटीआई के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही शिक्षा संस्थानों में वित्तीय और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भी आरटीआई एक प्रभावी माध्यम है।

पूर्व सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने साझा किए अनुभव

वेबीनार में पूर्व मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि उनके कार्यकाल से पहले शिक्षा विभाग से जुड़ी आरटीआई आवेदनों पर समयबद्ध जानकारी प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने बताया कि सूचना आयुक्त रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले दिए, जिनसे शिक्षा क्षेत्र में सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनी।

यह भी पढ़ें :-

राहुल सिंह ने कहा कि उनके निर्देशों के बाद कई निजी स्कूलों, विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में भी आरटीआई के दायरे से जुड़ी व्यवस्थाएं मजबूत हुईं तथा निर्धारित 30 दिनों की समयसीमा में सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाया गया। नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों पर दंडात्मक कार्रवाई भी की गई।

सैकड़ों प्रतिभागियों ने पूछे सवाल

वेबीनार के दौरान शिक्षा विभाग से जुड़े विभिन्न अनछुए पहलुओं पर चर्चा की गई। देशभर से जुड़े सैकड़ों प्रतिभागियों ने अपने प्रश्न रखे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से उत्तर दिया। वक्ताओं ने आरटीआई कानून के सही उपयोग, सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया और नागरिकों के अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

— स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट, रीवा (मध्यप्रदेश)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *