मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास — प्रशिक्षण को व्यवहारिक और आधुनिक बनाकर सुशासन को मिलेगी नई मजबूती
जयपुर, 31 जुलाई। राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा है कि राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की गुणवत्ता काफी हद तक लोकसेवकों की क्षमता, कार्यकुशलता, नैतिकता और नागरिकों के प्रति उनके संवेदनशील दृष्टिकोण पर निर्भर करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि बदलती प्रशासनिक चुनौतियों के अनुरूप अधिकारियों को तैयार करने का प्रभावी माध्यम है। इसलिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक व्यवहारिक, समकालीन और गुणवत्तापूर्ण बनाया जाना आवश्यक है।
मुख्य सचिव शुक्रवार को शासन सचिवालय में प्रशिक्षण विभाग एवं हरिश्चन्द्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान (एचसीएम रीपा) की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में प्रशिक्षण गतिविधियों, मिशन कर्मयोगी के तहत क्षमता निर्माण कार्यक्रमों, प्रशिक्षण अवसंरचना तथा भावी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई।
उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य प्रशासनिक सेवाओं के अधिकारियों के लिए मिड-कैरियर प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित किए जाएं। साथ ही विभिन्न सेवाओं के अधिकारियों के लिए समय-समय पर ऐसे प्रशिक्षण आयोजित हों, जिनसे उनकी कार्यक्षमता, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की योग्यता का निरंतर विकास हो सके।
मुख्य सचिव ने प्रशासनिक कार्यों में आधुनिक तकनीक के बढ़ते महत्व पर बल देते हुए कहा कि प्रशिक्षण में डिजिटल शिक्षण, तकनीक आधारित मॉड्यूल और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को व्यापक रूप से शामिल किया जाए। उन्होंने प्रशिक्षण अवसंरचना के आधुनिकीकरण, स्मार्ट कक्षाओं के विकास तथा उच्च गुणवत्ता वाले प्रशिक्षण वातावरण तैयार करने के निर्देश भी दिए। इसके अलावा शोध, प्रकाशनों और श्रेष्ठ प्रशिक्षण अनुभवों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
बैठक में एचसीएम रीपा की महानिदेशक एवं पदेन अतिरिक्त मुख्य सचिव (प्रशिक्षण) श्रेया गुहा ने संस्थान की विभिन्न प्रशिक्षण गतिविधियों, मिशन कर्मयोगी, साधना सप्ताह तथा यूएनएनएटीआई (UNNATI) पोर्टल के माध्यम से प्रशिक्षण संस्थानों के बीच संसाधनों, अध्ययन सामग्री और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान की जानकारी दी। बैठक में शासन सचिव कार्मिक अर्चना सिंह, वित्त विभाग तथा संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
