
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई, कल्पना मिश्रा प्रकरण से लेकर महिला मरीज की घटना और डॉक्टरों के आंदोलन पर सरकार का पक्ष; स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का भी किया उल्लेख
रीवा। संजय गांधी अस्पताल से जुड़े हालिया घटनाक्रम के बीच प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य विभाग से जुड़े मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मीडिया से बातचीत में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने डॉक्टरों के आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा वाटर कैनन और लाठीचार्ज किए जाने को अनावश्यक बताया। साथ ही कहा कि घटना के बाद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और मामले की जांच शुरू की गई है।
‘वाटर कैनन की जरूरत नहीं थी’
डॉक्टरों के आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई के सवाल पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वाटर कैनन और लाठीचार्ज की आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने कहा कि परिस्थितियों को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था। उनके मुताबिक मुख्यमंत्री ने घटना पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। मामले की जांच शुरू होने तथा मौके पर मौजूद दो संबंधित लोगों को लाइन अटैच किए जाने की बात भी उन्होंने कही।
कल्पना मिश्रा मामले में कार्रवाई का दावा
कल्पना मिश्रा की मौत के मामले में उपमुख्यमंत्री ने घटना को दुखद बताते हुए कहा कि सरकार ने औपचारिकताओं का इंतजार किए बिना कार्रवाई की। उनके अनुसार जिम्मेदार पाए गए डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की गई तथा डीन और अधीक्षक को भी बदला गया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य घटना की वास्तविक वजह सामने लाना है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
महिला मरीज के चेहरे पर कीड़े मिलने की घटना पर सफाई
महिला मरीज के चेहरे पर कीड़े मिलने से जुड़े वीडियो पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया पर घटना को पूरी तस्वीर के साथ प्रस्तुत नहीं किया गया। उन्होंने अस्पताल के मेडिकल प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए मरीज की स्थिति और हृदय की गतिविधि से संबंधित चिकित्सकीय पक्ष रखा। उनका कहना था कि इसी दौरान उड़ने वाले किसी जीव के संपर्क में आने से ऐसी स्थिति बनी और नर्सिंग स्टाफ ने उसे साफ किया।उन्होंने अस्पताल के आईसीयू और वार्ड में अनावश्यक लोगों की आवाजाही रोकने तथा निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार अटेंडेंट की संख्या सीमित करने की आवश्यकता भी बताई।
कांग्रेस के आरोपों पर स्वास्थ्य आंकड़ों का हवाला
प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर उपमुख्यमंत्री ने मातृ मृत्यु दर में आई कमी का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में काम कर रही है और किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
रीवा को मेडिकल हब बनाने की दिशा में काम
रीवा में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए उपमुख्यमंत्री ने 750 बेड के मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल के लिए करीब 450 करोड़ रुपये की स्वीकृति तथा 300 बेड के कैंसर अस्पताल का जिक्र किया। उन्होंने किडनी ट्रांसप्लांट, एंजियोप्लास्टी और बायपास सर्जरी जैसी उन्नत चिकित्सा सुविधाओं को भी रीवा के स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार का हिस्सा बताया।
डॉक्टरों की ड्यूटी और निजी प्रैक्टिस पर सख्त संदेश
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों की कार्यप्रणाली पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि कंसल्टेंट डॉक्टरों की जिम्मेदारी केवल ओपीडी तक सीमित नहीं है। नियमित राउंड, ऑपरेशन, यूजी-पीजी शिक्षण और गंभीर मरीजों की निगरानी भी उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने चिकित्सकों की निर्धारित समय पर मौजूदगी की निगरानी के लिए व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए जाने की बात कही।
अब व्यवस्था में बदलाव पर निगाह
संजय गांधी अस्पताल के हालिया घटनाक्रम ने मरीजों की सुरक्षा, डॉक्टरों की सुरक्षा, अस्पताल की अनुशासन व्यवस्था, चिकित्सकीय जवाबदेही और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। उपमुख्यमंत्री का बयान सरकार की ओर से इन मुद्दों पर अपना पक्ष है। अब देखना होगा कि जांच और कार्रवाई के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं में जमीन पर कितना बदलाव दिखाई देता है।
