संजय गांधी अस्पताल की घटना ने बढ़ाई बेचैनी, डीन समेत जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग पर अड़े परिजन; मुलाकात के बाद भी अनशन जारी, मीडिया से बातचीत किए बिना लौटे डिप्टी सीएम
रीवा। संजय गांधी अस्पताल में जच्चा और नवजात की मौत के बाद शुरू हुआ विरोध अब उस मुकाम पर पहुंच गया है, जहां एक परिवार का दर्द शासन-प्रशासन से जवाब मांग रहा है। पत्नी और नवजात बच्चे को खो चुके रामशिरोमणि मिश्रा न्याय की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं और उनका कहना है कि जब तक जिम्मेदारों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा। शुक्रवार को धरना स्थल पर उस समय हलचल बढ़ गई, जब उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल पीड़ित पिता से मुलाकात करने पहुंचे।मुलाकात के दौरान रामशिरोमणि मिश्रा ने अपनी पीड़ा और नाराजगी खुलकर सामने रखी। उन्होंने डीन समेत जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग दोहराते हुए कहा कि “अगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती तो मुझे भी मौत दे दो।” आत्महत्या की बात वाला यह बयान उस पिता की मानसिक पीड़ा को सामने लाता है, जिसने अस्पताल में अपनी पत्नी और बच्चे को खोने के बाद अब न्याय के लिए धरने का रास्ता चुना है।
डिप्टी सीएम पहुंचे, लेकिन धरना नहीं टूटा
धरना स्थल पर उपमुख्यमंत्री के पहुंचने से यह उम्मीद जरूर जगी कि पीड़ित परिवार और प्रशासन के बीच कोई रास्ता निकल सकता है। राजेंद्र शुक्ल ने रामशिरोमणि मिश्रा से बातचीत की, उनकी बात सुनी और मामले को लेकर चर्चा की। हालांकि मुलाकात के बाद भी पिता ने अपना अनशन समाप्त नहीं किया। परिवार अब भी अपनी मूल मांग पर कायम है —जिम्मेदारी तय हो और दोषियों पर कार्रवाई हो। पीड़ित पक्ष का तर्क है कि जांच और निलंबन जैसी कार्रवाई अपनी जगह है, लेकिन उनके लिए सवाल इससे आगे का है। आखिर उस पूरी व्यवस्था की जवाबदेही कौन तय करेगा, जिसके बीच इलाज के दौरान एक महिला और उसके नवजात की जान चली गई?
जांच से आगे कार्रवाई चाहता है परिवार
घटना को लेकर स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आई है। कुछ चिकित्सकों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई भी हुई है और मामले की जांच के लिए समिति गठित किए जाने की जानकारी है। इसके बावजूद पीड़ित परिवार संतुष्ट नहीं है।परिवार की नाराजगी इस बात को लेकर है कि जिम्मेदारी केवल कुछ लोगों पर कार्रवाई करके खत्म न कर दी जाए। उनका कहना है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिसकी भी भूमिका सामने आए, उसके खिलाफ जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
“हमें आश्वासन नहीं, न्याय चाहिए”
रामशिरोमणि मिश्रा का धरना अब सिर्फ एक मांग को लेकर नहीं, बल्कि उस सवाल को लेकर भी देखा जा रहा है जो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर खड़ा हो रहा है। एक तरफ अस्पताल में हुई घटना की जांच चल रही है, दूसरी तरफ पीड़ित परिवार न्याय की मांग को लेकर सड़क पर बैठा है।परिवार का कहना है कि मुआवजा या औपचारिक आश्वासन उनके खोए हुए जीवन की भरपाई नहीं कर सकता। उनकी मांग है कि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई हो, जिससे भविष्य में किसी दूसरे परिवार को ऐसी त्रासदी से न गुजरना पड़े।
मुलाकात के बाद मीडिया से दूरी
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल पीड़ित पिता से मुलाकात करने के बाद मीडिया से विस्तृत बातचीत किए बिना लौट गए। इस घटनाक्रम के बाद अब निगाहें सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिक गई हैं।धरने पर बैठे पिता का कहना है कि उनकी लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक उन्हें यह भरोसा नहीं हो जाता कि मामले में जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई करने में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। संजय गांधी अस्पताल की यह घटना अब रीवा में सिर्फ एक अस्पताल से जुड़ा विवाद नहीं रह गई है। यह सवाल बनकर सामने आ रही है कि जब इलाज के लिए सरकारी अस्पताल पर भरोसा करने वाला परिवार अपने दो सदस्यों को खो देता है, तब उस व्यवस्था की जवाबदेही आखिर किस स्तर तक तय होनी चाहिए? और फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या पीड़ित पिता की मांग पर सरकार कोई निर्णायक कदम उठाएगी, या न्याय की उम्मीद में उनका अनशन यूं ही जारी रहेगा?
