नई दिल्ली/रीवा | विशेष संवाददाता
देश की राजनीति में बढ़ते अपराधियों के दखल और न्याय मिलने में होने वाली देरी को लेकर देश भर के सूचना अधिकार (RTI) कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने मोर्चा खोल दिया है। प्रख्यात सूचना का अधिकार कार्यकर्ता और ज़ूम मीटिंग के होस्ट शिवानंद द्विवेदी के संचालन में आयोजित 287वीं RTI बैठक में राजनीति के अपराधीकरण को खत्म करने के लिए आर-पार की रणनीति तैयार की गई।
बैठक में यह निष्कर्ष निकला कि अब केवल चर्चा से काम नहीं चलेगा, बल्कि देश की विभिन्न अदालतों में जनहित याचिकाएं (PIL) दायर कर व्यवस्था परिवर्तन का दबाव बनाया जाएगा।
चिंताजनक आंकड़े: संसद में बढ़ता ‘दाग’
बैठक के दौरान प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि 2024 में निर्वाचित होकर आए 251 सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से कई पर हत्या और अपहरण जैसे गंभीर आरोप हैं। चर्चा के दौरान शिवानंद द्विवेदी ने इस बात पर जोर दिया कि राजनीति में अपराधीकरण का सीधा असर आम आदमी के अधिकारों और RTI जैसे पारदर्शी कानूनों के कमजोर होने पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि “जब रक्षक ही कानून तोड़ने वाले हों, तो जनता का सिस्टम से भरोसा उठने लगता है।”
प्रमुख सुधारों का ब्लूप्रिंट: एक साल में न्याय का लक्ष्य
बैठक में भाग ले रहे विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि जन प्रतिनिधियों के खिलाफ लंबित मुकदमों का फैसला एक साल की समय सीमा के भीतर होना चाहिए। इसके अलावा:
- न्यायिक सुधार: न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना और अदालतों में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का उपयोग करना।
- नोटा (NOTA) को शक्ति: यदि नोटा को सबसे ज्यादा वोट मिलें, तो उस क्षेत्र का चुनाव रद्द कर दोबारा मतदान कराया जाए।
- पारदर्शिता: RTI अधिनियम की धारा 4 का कड़ाई से पालन हो ताकि विभागों को खुद ही जानकारी सार्वजनिक करनी पड़े।
हाई कोर्ट्स में दायर होंगी याचिकाएं (Action Plan)
होस्ट शिवानंद द्विवेदी और समन्वयक प्रवीण पटेल के मार्गदर्शन में बैठक में तय किया गया कि चुनावी और न्यायिक सुधारों के लिए देश के अलग-अलग राज्यों में कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी:
- नाज़िर खान तेलंगाना हाई कोर्ट में याचिका दायर करेंगे।
- कमलेश त्रिपाठी जबलपुर (मध्य प्रदेश) हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
- उमा शंकर बिहार हाई कोर्ट में मोर्चा संभालेंगे।
बिना सरकारी मदद के ‘लीगल एड क्लीनिक’
बैठक में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि गरीब और शोषित वर्ग को कानूनी सहायता देने के लिए देश भर में ‘लीगल एड क्लीनिक’ खोले जाएंगे। खास बात यह है कि ये क्लीनिक बिना किसी सरकारी अनुदान के जन-सहयोग से संचालित किए जाएंगे। इसके लिए आगामी रविवार को एक विशेष वेबिनार आयोजित करने की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
मीडिया और भ्रष्टाचार पर प्रहार
बैठक में राजस्थान में चुनावी विज्ञापनों के नाम पर होने वाले भ्रष्टाचार और महाराष्ट्र में अवैध होर्डिंग्स के मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि वे न केवल सूचना मांगेंगे, बल्कि सूचना के आधार पर दोषियों को सजा दिलाने तक पीछे नहीं हटेंगे।
बॉक्स में:
“राजनीति का अपराधीकरण लोकतंत्र के लिए कैंसर की तरह है। हमारा लक्ष्य एक ऐसी व्यवस्था का निर्माण करना है जहाँ अपराधी चुनाव लड़ने की हिम्मत न कर सकें और आम आदमी को समय पर न्याय मिले।”
— शिवानंद द्विवेदी (होस्ट/RTI कार्यकर्ता)
287th RTI Meet video dekhen
