सरकार की महत्वाकांक्षी सौर योजना उपभोक्ताओं को महीनों तक चक्कर कटवाने के आरोप
अजमेर। देशभर में करोड़ों परिवारों को सस्ती और स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना को लेकर अजमेर में बैंक ऑफ बड़ौदा की वैशाली नगर शाखा के बैंक प्रबंधन पर योजना से संबंधित फाइलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने तथा उपभोक्ताओं को परेशान करने के आरोप लगाए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, अजमेर के एक व्यक्ति द्वारा Application No. NP-RJAJY26-11088062. on the PM Surya Ghar National Portal. Your bank details are 17370100013608, BANK OF BARODA, BARB0VAISHA. को आवेदन किया था । इस पर बैंक द्वारा आज दिन तक कोई जानकारी नहीं दी जा रही से परेशान होकर ।पत्र लिख प्रधानमंत्री कार्यालय सहित विभिन्न संबंधित विभागों को ई-मेल एवं ट्वीट के जरिये शिकायत भेजकर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत की प्रतिलिपि बैंक अधिकारियों एवं संबंधित शिकायत निवारण मंचों को भी भेजी गई है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यदि कोई उपभोक्ता बैंक से जुड़े बताए जा रहे पसंदीदा एजेंसियों के जरिए सोलर प्लांट लगवाता है तो उसकी फाइल अपेक्षाकृत 3/5 दिन में अप्रूव हो आगे बढ़ जाती है, जबकि अन्य अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से आवेदन करने वाले उपभोक्ताओं की फाइलें 15/20 दिन लंबे समय तक लंबित रखी जाती हैं।
शिकायत में दिए गए तथ्यों के अनुसार, जिन प्रकरणों का निस्तारण सामान्य रूप से कुछ दिनों में हो जाना चाहिए, उनमें 15 से 20 दिन किसी किसी फाइल में एक माह से अधिक समय लगा ऐसी जानकारी मिली। आरोप है कि संबंधित बैंक कर्मियों द्वारा उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी देने के बजाय बार-बार बैंक के चक्कर लगाने के लिए मजबूर किया गया।
शिकायत पत्र में एक विशेष प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कराने के बावजूद संबंधित फाइल को आगे नहीं बढ़ाया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बार-बार बैंक जाने के बाद भी उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इतना ही नहीं, फाइल को अलमारी के ऊपर रखे जाने तथा उसे न तो उच्च स्तर पर अग्रेषित करने और न ही उसकी स्थिति की जानकारी देने के आरोप भी लगाए गए हैं।
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शिकायत में बैंक के मौजूदा प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया गया है कि प्रधानमंत्री की जनकल्याणकारी योजना को आम नागरिकों को सुविधा उपलब्ध कराने के बजाय कथित रूप से निजी हितों और प्रभाव के आधार पर संचालित किया जा रहा है। यदि इन आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं होगा, बल्कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना की मूल भावना के भी विपरीत माना जाएगा।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर एक आम नागरिक को अपनी छत पर सोलर प्लांट लगाने और सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए बैंकों के बार-बार चक्कर क्यों काटने पड़ रहे हैं? यदि सरकारी योजनाओं की फाइलें भी पसंद-नापसंद और कथित प्रभाव के आधार पर आगे बढ़ेंगी तो आम जनता का विश्वास कैसे कायम रहेगा?
शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि शिकायत ई-मेल के माध्यम से भेजे जाने के तीन दिन बाद तक भी बैंक की ओर से यह जानकारी नहीं दी गई कि फाइल किस स्थिति में है, उसे आगे बढ़ाया गया है अथवा किसी कमी-पूर्ति के लिए रोका गया है।
अब आवश्यकता है कि बैंक ऑफ बड़ौदा मुख्यालय, विजिलेंस विभाग, वित्त मंत्रालय तथा संबंधित निगरानी एजेंसियां पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं। यदि जांच में पक्षपात, पद के दुरुपयोग, अनियमितता अथवा किसी प्रकार की कमीशनखोरी के तथ्य सामने आते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का उद्देश्य प्रत्येक पात्र नागरिक तक सौर ऊर्जा का लाभ पहुंचाना है। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि योजना का लाभ बिना किसी भेदभाव, दबाव, प्रभाव अथवा अनावश्यक देरी के आम जनता तक पारदर्शी तरीके से पहुंचे।

