भीलवाड़ा | 24 अक्टूबर 2025
भीलवाड़ा जिले के जसवंतपुरा स्थित एक पेट्रोल पंप पर हुए थप्पड़ कांड ने पूरे प्रदेश में प्रशासनिक हलचल मचा दी है। विवाद के बाद सरकार ने आरएएस अधिकारी छोटूलाल शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। शर्मा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें वे पंप कर्मचारी को थप्पड़ मारते दिखाई दे रहे हैं।
घटना की शुरुआत
मामला मंगलवार देर रात (22 अक्टूबर 2025) का है। आरएएस अधिकारी छोटूलाल शर्मा अपनी पत्नी दीपिका व्यास के साथ गाड़ी में पेट्रोल भरवाने पहुंचे थे। आरोप है कि पंप कर्मचारी किसी अन्य वाहन को पहले पेट्रोल दे रहा था, जिस पर अधिकारी ने आपत्ति जताई। इसी दौरान दोनों के बीच कहासुनी हो गई जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई।
पत्नी का आरोप कर्मी ने अश्लील इशारे किए
शर्मा की पत्नी दीपिका व्यास ने आरोप लगाया कि पेट्रोल पंप कर्मचारियों ने उनके सामने अश्लील इशारे किए और बदतमीजी की। वहीं, आरएएस अधिकारी का कहना है कि उन्होंने केवल अपनी पत्नी का सम्मान बचाने की कोशिश की थी। उनका यह भी कहना है कि वायरल सीसीटीवी फुटेज “एडिटेड” है जिसमें सच्चाई नहीं ।
वायरल वीडियो और पुलिस कार्रवाई
सीसीटीवी फुटेज में छोटूलाल शर्मा को पंप कर्मचारी को थप्पड़ मारते हुए देखा जा सकता है। इसके बाद कर्मचारी ने भी पलटकर हाथ उठाया। वीडियो में शर्मा यह कहते सुनाई देते हैं — “मैं एसडीएम हूं यहां का…”। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासन हरकत में आ गया।
पुलिस ने इस मामले में पंप के तीन कर्मचारियों — दीपक माली, प्रभुलाल कुमावत और राजा शर्मा — को गिरफ्तार किया है।
नया मोड “पत्नी” को लेकर विवाद
मामले में नया ट्विस्ट तब आया जब यह खुलासा हुआ कि शिकायत दर्ज कराने वाली दीपिका व्यास शर्मा की कानूनी पत्नी नहीं हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शर्मा की विधिक पत्नी पूनम शर्मा हैं, जो अलग रह रही हैं। इस खुलासे के बाद विवाद और गहरा गया तथा सरकार ने मामले की जांच तेज कर दी है।
राज्य सरकार ने छोटूलाल शर्मा को निलंबित करते हुए उनका मुख्यालय जयपुर सचिवालय में स्थानांतरित कर दिया है। निलंबन आदेश राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 की धारा 13 के तहत जारी किया गया। प्रशासन ने कहा है कि “राज्य सेवा में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
शर्मा पर पहले भी लगे हैं आरोप
शर्मा पहले भी विवादों में रहे हैं। उनके खिलाफ 2017 और 2018 में सार्वजनिक विवादों के मामले दर्ज हो चुके हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, उनके खिलाफ अनुशासनहीनता से जुड़े प्रकरणों की जांच पहले भी चल चुकी है।
फिलहाल, पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर रही है और सीसीटीवी फुटेज की तकनीकी जांच की जा रही है। सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया है। वहीं, सोशल मीडिया पर यह वीडियो लगातार चर्चा में है और आमजन से लेकर अधिकारी वर्ग तक इस घटना पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
भीलवाड़ा का यह “थप्पड़ कांड” केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और नैतिक आचरण की बहस को भी जन्म दे गया है। सत्ता और सेवा के बीच की मर्यादा कहाँ तक है — यह सवाल अब प्रदेशभर में गूंज रहा है।
