नईदिल्ली|मद्रास हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि ऑनलाइन शिक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित उपकरण, जैसे ChatGPT, कभी भी योग्य शिक्षकों और प्रत्यक्ष कक्षा शिक्षण का विकल्प नहीं बन सकते। न्यायमूर्ति एस.एम. सुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति एन. सेंथिलकुमार की खंडपीठ ने तमिलनाडु डॉ. अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी के उन छात्रों को राहत देने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश को रद्द कर दिया, जिन्हें न्यूनतम उपस्थिति पूरी न होने के बावजूद कक्षाओं और परीक्षाओं में शामिल होने की अनुमति दी गई थी।
अदालत ने कहा कि नियमित कक्षा उपस्थिति केवल पाठ्य ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि इससे छात्रों में अनुशासन, समयपालन, सामाजिक व्यवहार, आपसी संवाद और सक्रिय सहभागिता जैसे गुण विकसित होते हैं। न्यायालय के अनुसार, ऑनलाइन कक्षाएं आवश्यकता पड़ने पर सहायक माध्यम हो सकती हैं, किंतु वे भौतिक कक्षाओं का स्थान नहीं ले सकतीं। ChatGPT या अन्य AI उपकरण जानकारी प्रदान कर सकते हैं, परंतु वे ईमानदारी, नैतिकता और पेशेगत मूल्यों जैसे गुण नहीं सिखा सकते, जो विशेष रूप से विधि व्यवसाय की आधारशिला हैं।
खंडपीठ ने यह भी कहा कि विधि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार या आर्थिक लाभ प्राप्त करना नहीं है, बल्कि छात्रों में संविधान, समाज और न्याय व्यवस्था के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी है। कक्षा में होने वाले विचार-विमर्श, बहस और सामाजिक संवाद ही नए कानूनी दृष्टिकोणों और विचारों को जन्म देते हैं।
यह मामला उन छात्रों से संबंधित था जिन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा निर्धारित न्यूनतम उपस्थिति की शर्त पूरी नहीं की थी। BCI नियमों के अनुसार विधि छात्रों के लिए 70 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है तथा विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 5 प्रतिशत की छूट दी जा सकती है, जिससे न्यूनतम 65 प्रतिशत उपस्थिति आवश्यक रहती है। अदालत ने कहा कि इससे अधिक छूट देना नियमों के उद्देश्य को विफल कर देगा। अंततः न्यायालय ने विश्वविद्यालय की अपील स्वीकार करते हुए अनिवार्य उपस्थिति संबंधी नियमों को बरकरार रखा।
