राजस्थान: ग्रामीण पशुपालन संस्थाओं के लिए बड़ी सौगात

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ग्रामीण पशुपालन संस्थाओं के लिए सरकार की बड़ी सौगात -भवन, चारदीवारी और आधारभूत सुविधाओं के विकास हेतु 5 से 25 लाख रुपये तक का प्रावधान, सरकार ने मांगे प्रस्ताव


जयपुर, 7 अगस्त। राजस्थान सरकार के पशुपालन विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन से जुड़ी संस्थाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए VB-G RAM-G (विकसित भारत – गारंटी रोजगार आजीविका मिशन – ग्रामीण योजना) के अंतर्गत भवन एवं आधारभूत संरचना निर्माण के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, भवनविहीन एवं भूमि उपलब्ध पशुपालन संस्थाओं के प्रस्ताव ग्राम पंचायतों के माध्यम से संबंधित ग्राम विकास अधिकारी एवं खंड विकास अधिकारी को भेजे जाएंगे।
निदेशक, पशुपालन विभाग द्वारा 4 अगस्त 2026 को जारी आदेश में बताया गया है कि यह योजना भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका मिशन का हिस्सा है। इसका उद्देश्य राज्य में पशुपालन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना विकसित करना है।
योजना के तहत पशुपालन विभाग ने ग्रामीण विकास विभाग को 888 करोड़ रुपये के प्रस्ताव भेजे हैं। इन प्रस्तावों में विभागीय संस्थाओं के भवन निर्माण, चारदीवारी निर्माण, हरा चारा उत्पादन तथा ग्रास लैंड (चरागाह) विकास जैसे कार्य शामिल हैं। प्रत्येक स्वीकृत कार्य के लिए 5 लाख रुपये से 25 लाख रुपये तक की राशि प्रस्तावित की गई है।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिन पशुपालन संस्थाओं के पास भूमि का वैध पट्टा है, लेकिन भवन उपलब्ध नहीं है, वे इस योजना का लाभ उठा सकती हैं। ऐसे संस्थानों को ग्राम पंचायत के माध्यम से अपना प्रस्ताव तैयार कर संबंधित ग्राम विकास अधिकारी, खंड विकास अधिकारी तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को निर्धारित दस्तावेजों सहित भेजना होगा।

प्रस्ताव के साथ ये दस्तावेज होंगे अनिवार्य
संस्था की भूमि का पट्टा एवं क्षेत्रफल (वर्गगज/वर्गमीटर)
खसरा संख्या
भूमि की गूगल लोकेशन
जिला, खंड एवं ग्राम पंचायत का विवरण
प्रस्तावित भवन का नक्शा/तकमीना
भवन निर्माण की अनुमानित लागत

पशुपालन विभाग ने सभी जिला स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पात्र संस्थाओं के प्रस्ताव समयबद्ध रूप से प्राप्त कर अग्रिम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा संबंधित आवेदकों को भी कार्रवाई से अवगत कराया जाए।
जानकारों का मानना है कि इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन गतिविधियों को आधुनिक आधारभूत सुविधाएं मिलेंगी, जिससे डेयरी, गोपालन एवं अन्य पशुधन आधारित आजीविका को मजबूती मिलेगी। साथ ही ग्रामीण रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को भी नई गति प्राप्त होगी।

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