IIAC और DIAC के ढांचे को मजबूत करने, ऑनलाइन विवाद समाधान बढ़ाने तथा मध्यस्था अधिनियम-2023 के प्रभावी क्रियान्वयन की अनुशंसा
नई दिल्ली, 7 अगस्त। संसद की विभाग-संबंधित कार्मिक, लोक शिकायत, विधि एवं न्याय संबंधी स्थायी समिति ने वैकल्पिक विवाद समाधान (Alternative Dispute Resolution-ADR) प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए व्यापक सुधारों की सिफारिश की है। राज्यसभा सदस्य ब्रिज लाल की अध्यक्षता वाली समिति की 165वीं रिपोर्ट शनिवार को संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत की गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में बढ़ते न्यायिक लंबित मामलों को कम करने और विवादों के त्वरित, कम खर्चीले एवं सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए एडीआर तंत्र को संस्थागत रूप से मजबूत करना समय की आवश्यकता है। समिति ने अपनी जांच के दौरान विधि एवं न्याय मंत्रालय, कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय तथा दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र सहित विभिन्न हितधारकों से विस्तृत विचार-विमर्श किया।
भारत अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र के प्रदर्शन की समीक्षा पर जोर
समिति ने भारत अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (IIAC) पर सार्वजनिक धन के बड़े निवेश का उल्लेख करते हुए उसके कार्य-निष्पादन का नियमित मूल्यांकन करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सिंगापुर, हांगकांग और लंदन जैसे वैश्विक मध्यस्थता संस्थानों की तुलना में IIAC की दृश्यता और उपयोग सीमित है। इसलिए इसके कार्यभार, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, शुल्क संरचना, नियमों और प्रक्रियाओं की समीक्षा कर सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
समिति ने मध्यस्थों के पैनल का विस्तार, अधिक अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को शामिल करने, समयबद्ध प्रक्रियाएं अपनाने तथा स्पष्ट प्रदर्शन मानक तय करने की भी अनुशंसा की है।
दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र को संसाधन बढ़ाने की सलाह
रिपोर्ट में दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (DIAC) के समक्ष बुनियादी ढांचे, प्रशासनिक क्षमता और वित्तीय संसाधनों की कमी को प्रमुख चुनौती बताया गया है। समिति ने समर्पित मध्यस्थता केंद्र स्थापित करने, प्रशासनिक ढांचा मजबूत करने और संस्थागत मध्यस्थता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय एवं स्थानीय स्तर पर अभियान चलाने की सिफारिश की।
उद्योग, मंत्रालयों और पीएसयू को जोड़ने पर बल
समिति ने सुझाव दिया कि IIAC को केंद्र सरकार के मंत्रालयों, सार्वजनिक उपक्रमों और बड़े उद्योग समूहों के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए विशेष आउटरीच कार्यक्रम चलाने चाहिए। साथ ही सीआईआई, फिक्की और एसोचैम जैसे उद्योग संगठनों के साथ समझौते कर वाणिज्यिक अनुबंधों में IIAC को प्राथमिक मध्यस्थता मंच के रूप में शामिल करने के प्रयास किए जाएं।
तकनीक आधारित विवाद समाधान को बढ़ावा
रिपोर्ट में ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। समिति ने गैर-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल बुनियादी ढांचा विकसित करने, उपयोगकर्ता-अनुकूल डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करने तथा हितधारकों को डिजिटल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की सिफारिश की है।
मध्यस्था अधिनियम, 2023 के प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत
समिति ने कहा कि मध्यस्था अधिनियम, 2023 भारत में विवाद समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार है, जो मुकदमे से पहले, ऑनलाइन और सामुदायिक मध्यस्था को कानूनी आधार प्रदान करता है। रिपोर्ट में भारतीय मध्यस्थता परिषद (MCI) की स्थापना में तेजी लाने, शेष प्रावधानों की शीघ्र अधिसूचना तथा पूर्व-संस्थागत मध्यस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक वैधानिक उपाय अपनाने की सिफारिश की गई है।
लोक अदालतों और नालसा को भी मजबूत करने का सुझाव
समिति ने लोक अदालतों के लिए मामलों के चयन और निपटान संबंधी स्पष्ट दिशानिर्देश तैयार करने तथा उनके परिणामों की नियमित निगरानी करने की अनुशंसा की है। इसके साथ ही राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) में रिक्त पद शीघ्र भरने, पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने और संस्थागत ढांचा मजबूत करने की भी सिफारिश की गई है।
समिति का निष्कर्ष
रिपोर्ट के अनुसार भारत का विवाद समाधान तंत्र अब अधिक आधुनिक, प्रभावी और संस्थागत व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, जहां एडीआर की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जाएगी। समिति ने कहा कि न्याय प्रणाली पर जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए निष्पक्षता, तटस्थता, समयबद्ध निर्णय, सक्षम संस्थाएं, प्रशिक्षित पेशेवर और निरंतर सुधार अत्यंत आवश्यक हैं। समिति ने भविष्य में एडीआर प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए नियमित समीक्षा, संस्थागत समन्वय और नीति सुधार जारी रखने पर बल दिया।
