कल्पना मिश्रा और नवजात की मौत के मामले में सिरमौर चौराहे पर चल रहा आंदोलन तेज; पिता रामशिरोमणि मिश्रा की बिगड़ती हालत से बढ़ी चिंता, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बोले—इतने दिन से संघर्ष के बावजूद सरकार खामोश
रीवा। संजय गांधी अस्पताल में कल्पना मिश्रा और उनके नवजात शिशु की मौत के बाद न्याय की मांग को लेकर शुरू हुआ संघर्ष अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। सिरमौर चौराहे पर अनशन कर रहे कल्पना के पिता रामशिरोमणि मिश्रा का गुरुवार को नौवां दिन रहा। लगातार उपवास के कारण उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर होती जा रही है और परिजनों के मुताबिक अब वे पहले की तरह बैठकर भी अनशन नहीं कर पा रहे हैं।अनशन स्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार उनकी कमजोरी साफ दिखाई दे रही है। पिछले दिनों तक बैठकर अपनी मांग को लेकर डटे रहने वाले रामशिरोमणि मिश्रा को गुरुवार को अधिक समय लेटे हुए बिताना पड़ा। परिजन बताते हैं कि बातचीत करने और सामान्य रूप से बैठने में भी उन्हें परेशानी हो रही है।
नौ दिन बाद भी सवाल कायम, परिवार को ठोस कार्रवाई का इंतजार
परिवार का कहना है कि आंदोलन को नौ दिन बीत चुके हैं, लेकिन उन्हें अभी तक ऐसा ठोस आश्वासन नहीं मिला है जिससे वे अनशन समाप्त करने के लिए तैयार हों। उनका आरोप है कि प्रशासन की ओर से जांच की बात तो कही जा रही है, लेकिन जिम्मेदारी तय करने की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।रामशिरोमणि मिश्रा की लगातार गिरती सेहत ने आंदोलन को और संवेदनशील बना दिया है। अनशन स्थल पर पहुंचने वाले लोग उनकी स्थिति देखकर चिंता जता रहे हैं।
रीवा पहुंचे जीतू पटवारी, आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन
इसी बीच गुरुवार को मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी रीवा पहुंचे। उन्होंने अग्रसेन चौराहे पर चल रहे कांग्रेस के न्याय सत्याग्रह में हिस्सा लिया और कल्पना मिश्रा के मामले को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला।पटवारी ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक पिता नौ दिनों से अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए भूखा बैठा है, लेकिन सरकार की ओर से अपेक्षित संवेदनशीलता दिखाई नहीं दे रही है।उन्होंने संजय गांधी अस्पताल की स्थिति को लेकर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया और स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही तय किए जाने की मांग उठाई।
संजय गांधी अस्पताल बना सियासी टकराव का केंद्र
विंध्य के प्रमुख चिकित्सा संस्थान संजय गांधी अस्पताल से जुड़े इस प्रकरण ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। एक ओर पीड़ित परिवार न्याय की मांग को लेकर आंदोलनरत है, वहीं कांग्रेस ने इस मामले को सरकार और स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही से जोड़ते हुए आंदोलन तेज कर दिया है।कांग्रेस का आरोप है कि अस्पताल की व्यवस्थाओं में गंभीर खामियां हैं और जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। दूसरी ओर, पूरे मामले में प्रशासनिक एवं चिकित्सकीय जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे, जिनसे यह स्पष्ट होगा कि मौत के लिए वास्तविक रूप से कौन जिम्मेदार था।
अब सबसे बड़ा सवाल—पिता की बिगड़ती हालत का जिम्मेदार कौन?
रीवा में इस समय सबसे गंभीर तस्वीर सिरमौर चौराहे से सामने आ रही है—एक पिता अपनी बेटी को न्याय दिलाने की मांग लेकर नौ दिन से अन्न त्यागे बैठा है और अब उसका शरीर साथ छोड़ने लगा है।अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है—एक तरफ मामले की निष्पक्ष जांच और दूसरी तरफ लगातार कमजोर हो रहे अनशनकारी की सेहत।रामशिरोमणि मिश्रा की बिगड़ती हालत के बीच निगाहें अब प्रशासन की अगली पहल पर टिक गई हैं। सवाल यही है कि न्याय की मांग कर रहे इस पिता को कब ठोस जवाब मिलेगा और उनका अनशन कब समाप्त होगा?
