“महाराज! माला पहनाते-पहनाते जिंदगी निकल गई, खाद नहीं मिला…” किसान की यह बात सुन सिंधिया ने कलेक्टर से कहा—‘पेन-पैड निकालिए, नाम-नंबर नोट करिए’

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गुना में खाद संकट ने जनसंपर्क के बीच खींचा ध्यान, किसानों ने ऑनलाइन टोकन व्यवस्था पर उठाए सवाल; शिकायतें दर्ज कराने के निर्देश

गुना। खेतों में खड़ी फसल के बीच खाद की तलाश में भटक रहे किसानों का दर्द गुरुवार को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने उस समय खुलकर सामने आया, जब गुना के सर्किट हाउस में जनसंपर्क के दौरान पगारा सहित आसपास के गांवों से पहुंचे किसानों ने खाद नहीं मिलने की शिकायत रखी। किसानों की बात में सिर्फ खाद की कमी की शिकायत नहीं थी, बल्कि ऑनलाइन टोकन व्यवस्था से लेकर वितरण प्रणाली तक को लेकर उनकी परेशानी साफ दिखाई दी। इसी दौरान एक किसान ने अपनी पीड़ा बेहद सहज लेकिन मार्मिक अंदाज में रखी—“महाराज, जिंदगी हो गई माला पहनाते-पहनाते, खाद मिला नहीं।” किसान की यह बात सुनकर सिंधिया ने तत्काल मामले को गंभीरता से लिया और मौके पर मौजूद गुना कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल से किसानों की शिकायतें दर्ज करने को कहा।

‘ठीक है’ पर सिंधिया ने कहा—ठीक है नहीं, नोट करिए

गुना में खाद की किल्लत और ऑनलाइन टोकन की समस्या को लेकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से शिकायत करते किसान, मौके पर कलेक्टर को शिकायतें दर्ज कराने के निर्देश.
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किसानों की शिकायत सुनने के बाद सिंधिया ने कलेक्टर से सभी किसानों के नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करने को कहा। जब कलेक्टर की ओर से ‘ठीक है’ कहा गया तो सिंधिया ने स्पष्ट लहजे में कहा—“ठीक है नहीं, नोट करिए। पेन और पैड निकालिए।” इसके बाद मौके पर किसानों की जानकारी दर्ज की गई, ताकि उनकी व्यक्तिगत शिकायतों पर आगे कार्रवाई की जा सके।

कुछ ही देर में खत्म हो जाते हैं ऑनलाइन टोकन—किसानों की शिकायत

पगारा और आसपास के ग्रामीण इलाकों से पहुंचे किसानों ने ऑनलाइन टोकन व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि खाद की बुकिंग के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू होते ही कुछ ही समय बाद टोकन उपलब्ध नहीं होने की स्थिति सामने आ जाती है। कई किसानों का दावा है कि वे लगातार प्रयास करने के बावजूद टोकन हासिल नहीं कर पा रहे हैं। किसानों ने ऑनलाइन व्यवस्था की जांच कराने और खाद वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग की। कुछ किसानों ने टोकन की कथित कालाबाजारी और बिचौलियों की भूमिका की आशंका भी जताई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी तकनीकी गड़बड़ी अथवा अनियमितता का निष्कर्ष जांच के बिना निकालना उचित नहीं होगा।

सवाल सिर्फ खाद का नहीं, व्यवस्था तक पहुंच का भी

किसानों की शिकायतों ने खाद की उपलब्धता के साथ-साथ उस व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा किया है, जिसके जरिए किसान खाद हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। जब खेत में फसल खड़ी हो और समय पर खाद उपलब्ध न हो, तब ऑनलाइन टोकन के लिए बार-बार प्रयास करना किसान के लिए अतिरिक्त परेशानी बन जाता है।यही वजह रही कि सिंधिया ने मौके पर ही शिकायतों को केवल सुनने तक सीमित रखने के बजाय किसानों के नाम और मोबाइल नंबर दर्ज कराने के निर्देश दिए। अब इन शिकायतों पर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और किसानों को वास्तविक राहत कब मिलती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

चार दिवसीय गुना दौरे के बीच सामने आया किसानों का मुद्दा

ज्योतिरादित्य सिंधिया का गुना दौरा 16 से 19 सितंबर तक निर्धारित है। दौरे के दौरान जनसंपर्क और विभिन्न कार्यक्रमों के बीच खाद को लेकर किसानों की शिकायत प्रमुखता से सामने आई। गुना जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर किशोर कुमार कन्याल को कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। अब किसानों की नजर इस बात पर है कि सर्किट हाउस में दर्ज हुए नाम और मोबाइल नंबर सिर्फ कागज तक सीमित रहते हैं या वास्तव में खेत तक खाद पहुंचाने की व्यवस्था में बदलाव दिखाई देता है। फिलहाल किसानों की शिकायत दर्ज हो चुकी है और गेंद प्रशासन के पाले में है।

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