ग्वालियर खंडपीठ में याचिका पर सुनवाई, योजना के खर्च और वित्तीय दायित्व को लेकर उठे सवाल; अदालत ने फिलहाल भुगतान रोकने या योजना बंद करने का कोई आदेश नहीं दिया
ग्वालियर। मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना को लेकर हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में दाखिल जनहित याचिका ने अब सरकार के सामने योजना से जुड़े आंकड़े और रिकॉर्ड अदालत के समक्ष रखने की स्थिति पैदा कर दी है। बुधवार को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया। याचिका में योजना की मौजूदा व्यवस्था, इससे जुड़े सरकारी खर्च, लाभार्थियों की संख्या और राज्य पर पड़ने वाले वित्तीय दायित्व को लेकर सवाल उठाए गए हैं। अदालत ने सरकार से योजना के सभी हितग्राहियों का विवरण उपलब्ध कराने को कहा है, ताकि आवश्यक लाभार्थियों को मामले में पक्षकार बनाए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
हितग्राहियों का रिकॉर्ड सरकार के पास, अदालत ने मांगा विवरण
सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू यह सामने आया कि योजना से लाभ लेने वाली सभी महिलाओं को प्रकरण में पक्षकार नहीं बनाया गया है। इस पर अदालत के समक्ष यह बात आई कि हितग्राहियों का पूरा रिकॉर्ड राज्य सरकार के पास उपलब्ध है।इसके बाद सरकार को संबंधित विवरण याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, ताकि जिन हितग्राहियों को मामले में पक्षकार बनाया जाना आवश्यक हो, उन्हें प्रक्रिया में शामिल किया जा सके। अदालत ने नोटिस की प्रक्रिया को लेकर भी राज्य सरकार की भूमिका स्पष्ट की है।
याचिका में सरकारी खर्च और योजना के असर पर सवाल
ग्वालियर निवासी सुधा दुबे की ओर से दाखिल याचिका में योजना के तहत होने वाले नियमित भुगतान और उसके कारण राज्य सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय दायित्व को लेकर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने पक्ष रखा। याचिका में यह मुद्दा भी उठाया गया है कि महिलाओं को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता देने वाली व्यवस्था का दीर्घकालिक प्रभाव क्या है और राज्य के संसाधनों का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है। याचिकाकर्ता की ये दलीलें हैं; इन पर राज्य सरकार का विस्तृत पक्ष अभी अदालत के सामने आना बाकी है।रिपोर्टों के मुताबिक याचिका में योजना पर हर महीने होने वाले लगभग 1,900 करोड़ रुपये के खर्च का भी उल्लेख किया गया है। यह आंकड़ा याचिकाकर्ता की ओर से रखी गई दलीलों का हिस्सा है, जिसे सरकार के जवाब और आधिकारिक रिकॉर्ड के संदर्भ में देखा जाना है।
चार सप्ताह में जवाब, लेकिन योजना पर तत्काल रोक नहीं
अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि हाई कोर्ट ने फिलहाल लाड़ली बहना योजना को बंद करने, मासिक सहायता रोकने या लाभार्थियों की किस्त पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश नहीं दिया है। योजना की वैधता पर भी इस चरण में कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। इसलिए हाई कोर्ट में याचिका की सुनवाई शुरू होने को योजना के तत्काल बंद होने या अगली किस्त रुकने के रूप में देखना सही नहीं होगा। फिलहाल मामला नोटिस, रिकॉर्ड और सरकार के जवाब के चरण में है।
अब सरकार के जवाब पर टिकी नजर
अदालत के निर्देश के बाद अब राज्य सरकार को योजना से जुड़े लाभार्थियों और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड अदालत के समक्ष रखने होंगे। इसके बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी और योजना को लेकर उठाए गए कानूनी तथा वित्तीय सवालों पर दोनों पक्षों की दलीलें सामने आएंगी।इस पूरे घटनाक्रम के बीच लाभार्थी महिलाओं के लिए फिलहाल सबसे अहम तथ्य यही है कि अदालत ने योजना बंद करने या भुगतान रोकने का कोई आदेश नहीं दिया है। सितंबर 2026 की किस्त के वितरण का सरकारी वेबकास्ट भी 13 सितंबर को दर्ज है। अब असली तस्वीर सरकार के जवाब, प्रस्तुत किए जाने वाले रिकॉर्ड और आगामी सुनवाई के बाद ही साफ होगी।

