ब्रह्मोस नई ऊँचाइयों पर: भारत–रूस ने बढ़ाई सामरिक साझेदारी, 2030 तक नौसेना होगी ब्रह्मोस से लैस

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भारत ने किया ब्रह्मोस का सफल प्रिसिजन लॉन्च, अगली पीढ़ी की ब्रह्मोस-NG 2026 में उड़ान भरेगी

नई दिल्ली। भारत की सामरिक क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में ब्रह्मोस मिसाइल कार्यक्रम लगातार प्रगति कर रहा है। हाल ही में भारतीय सेना ने बंगाल की खाड़ी से ब्रह्मोस का सफल “लॉन्ग-रेंज प्रिसिजन लॉन्च” किया, जिसे युद्ध परिस्थितियों जैसे परीक्षण की तरह अंजाम दिया गया। यह परीक्षण भारतीय क्षमताओं को बढ़ाता है । दर्शाता है कि ब्रह्मोस प्लेटफॉर्म आज भी उतना ही प्रासंगिक और शक्तिशाली है।

2030 तक सभी नौसैनिक युद्धपोतों पर ब्रह्मोस

भारतीय नौसेना ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि 2030 तक पूरे बेड़े को ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस किया जाएगा। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की मारक क्षमता और निगरानी क्षमता अत्यधिक मजबूत होगी।

ब्रह्मोस-NG: छोटा, तेज और अधिक सक्षम

भारत–रूस संयुक्त रूप से BrahMos Aerospace तेजी से BrahMos-NG तैयार कर रहा है। जिसकी पहली उड़ान परीक्षण 2026 में किया जाना है ।इसके साथ ही भारत 2027-28 तक लखनऊ में इसका निर्माण शुरू करेगा। इसका वजन मौजूदा मिसाइल से आधा होगा जिसकी गति Mach 3+ ,इस मिसाइल को लड़ाकू विमानों जैसे तेजस,MiG-29k पर भी तैनात की जा सकेगी । यह मिसाइल बहु प्लेटफॉर्म पर भारत की मारक क्षमता बढ़ाएगी ।

मोदी–पुतिन वार्ता में उन्नत ब्रह्मोस वर्ज़न प्रमुख एजेंडा

रूसी राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच रक्षा सहयोग पर महत्वपूर्ण वार्ता हुई।
इसमें ब्रह्मोस-NG, तकनीकी सहयोग, इंजन निर्माण और भविष्य के उन्नत वर्ज़न को लेकर विस्तृत चर्चा शामिल रही।

यह वार्ता न केवल सामरिक सहयोग बल्कि भारत के रक्षा उद्योग में आत्मनिर्भरता को भी मजबूती प्रदान करेगी।

इस मिसाल से भारत की सामरिक क्षमता बढ़ेगी, हिंद महासागर में चौकसी बढ़ेगी। भारत रक्षा उद्योग में अपने घरेलू रोजगार में तकनीक को बढ़ावा मिलेगा । आत्मनिर्भर भारत’ मिशन को गति मिलेगी ।

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