पुराने प्रकरण का हवाला देकर कार्रवाई से बचाने और नया बिजली मीटर लगवाने के बदले मांगी थी ₹20 हजार की रकम, शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त ने बिछाया जाल
भोपाल। सरकारी दफ्तर में बिजली कनेक्शन और मीटर लगाने जैसी आम नागरिक की जरूरत को कथित तौर पर रिश्वत के सौदे में बदलना विद्युत विभाग के दो अधिकारियों को भारी पड़ गया। राजधानी भोपाल में लोकायुक्त पुलिस ने छोला क्षेत्र स्थित विद्युत मंडल कार्यालय में कार्रवाई करते हुए सहायक अभियंता (AE) राजेंद्र वरवड़े और कनिष्ठ अभियंता (JE) अमित कुमार उपाध्याय को ₹15 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के बाद विद्युत विभाग के कार्यालय में हड़कंप की स्थिति बन गई।मामला मकान में नया बिजली मीटर लगाए जाने से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता तारिक सिद्दीकी अपने मकान में किरायेदार रखने के लिए नया बिजली मीटर लगवाना चाहता था। इसी सिलसिले में वह छोला स्थित विद्युत कार्यालय पहुंचा था। आरोप है कि वहां अधिकारियों ने मकान से संबंधित पुराने मामले का हवाला देते हुए चालान बनाए जाने की बात कही। इसके बाद कथित तौर पर प्रकरण में कार्रवाई से राहत देने और नया मीटर लगवाने के एवज में ₹20 हजार की रिश्वत की मांग की गई।शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने के बजाय पूरे मामले की शिकायत लोकायुक्त पुलिस भोपाल से करने का रास्ता चुना। 7 सितंबर को शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने शिकायत का सत्यापन कराया। सत्यापन में शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होने के बाद अधिकारियों को पकड़ने की योजना तैयार की गई।इसके बाद 9 सितंबर को लोकायुक्त की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया। जैसे ही रिश्वत की रकम का लेन-देन हुआ, टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए AE राजेंद्र वरवड़े और JE अमित कुमार उपाध्याय को ₹15 हजार की कथित रिश्वत राशि के साथ पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान टीम ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और दोनों अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के आरोप में प्रकरण दर्ज करने की कार्रवाई शुरू की।लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, मामले में आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत कार्रवाई की जा रही है। इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व उप पुलिस अधीक्षक वीरेन्द्र सिंह ने किया, जबकि निरीक्षक घनश्याम सिंह मर्सकोले सहित लोकायुक्त टीम के अन्य अधिकारी और कर्मचारी ट्रैप कार्रवाई में शामिल रहे।
लोकायुक्त की कार्रवाई से विभाग में मचा हड़कंप
बिजली मीटर जैसी मूलभूत सुविधा के लिए रिश्वत मांगे जाने के आरोप और उसके बाद लोकायुक्त की कार्रवाई ने सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार को लेकर फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि शिकायतकर्ता ने कथित मांग के आगे झुकने के बजाय सीधे लोकायुक्त का दरवाजा खटखटाया और सत्यापन के बाद पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। अब लोकायुक्त पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होगा कि रिश्वत की मांग और लेन-देन में दोनों अधिकारियों की क्या भूमिका थी तथा पुराने प्रकरण के नाम पर की गई कार्रवाई के पीछे वास्तविक स्थिति क्या थी।
