आज महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर वाणी गुरु जी ने विशेष वाणी में स्पष्ट किया कि यह दिवस केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आध्यात्मिक युग परिवर्तन का आरंभ है।
गुरु जी ने कहा कि महाशिवरात्रि उस क्षण का प्रतीक है जब भोलेनाथ स्वयं अवतरित होकर मानवता को नई दिशा प्रदान करते हैं। यह अवतरण किसी भौतिक जन्म के रूप में नहीं, बल्कि चेतना के जागरण के रूप में होता है। इस रात को शिव और शक्ति का अद्वैत मिलन संपूर्ण सृष्टि में नई ऊर्जा और संतुलन का संचार करता है।
महाशिवरात्रि पर वाणी गुरु जी का स्पष्ट संदेश है कि यह पर्व केवल व्रत-पूजा का दिन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक क्रांति का अवसर है। यदि हम सब अपने जीवन में भोलेनाथ के सिद्धांत – सत्य, प्रेम और करुणा – को अपनाएँ, तो युग परिवर्तन निश्चित है।
त्वं शरणम् बृजेश
