नई दिल्ली। (मीडिया) पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल में प्रधानमंत्री के एक बयान ने राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। राज्य की चुनावी सभा में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—“4 मई के बाद हर गुंडे, भ्रष्टाचारी और अत्याचारियों का हिसाब होगा”। यह बयान सीधे तौर पर सत्ताधारी और मुख्यमंत्री की सरकार पर तीखा हमला माना जा रहा है।
अप्रैल 2026 के अंतिम दिनों में आरामबाग, कूचबिहार और पनिहाटी जैसे क्षेत्रों में हुई रैलियों में प्रधानमंत्री ने कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और महिला सुरक्षा के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया गया है और आम जनता भय और असुरक्षा के माहौल में जी रही है। अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव परिणाम के बाद किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और हर अन्याय का हिसाब लिया जाएगा।
यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान पूरा हो चुका है और अब सबकी नजरें 4 मई 2026 को आने वाले परिणामों पर टिकी हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह बयान मतदाताओं को एक स्पष्ट संदेश देने की कोशिश है—जिसमें सख्त प्रशासन और जवाबदेही का वादा किया गया है।
हालांकि, सत्ताधारी पक्ष ने इस बयान को चुनावी रणनीति बताते हुए पलटवार किया है और इसे भय पैदा करने वाली राजनीति करार दिया है। इसके बावजूद, यह साफ है कि बंगाल की राजनीति अब केवल वादों तक सीमित नहीं रही, बल्कि “हिसाब” और “जवाबदेही” जैसे शब्दों के इर्द-गिर्द घूम रही है।
अब देखना यह होगा कि 4 मई के बाद यह सियासी चेतावनी हकीकत में बदलती है या फिर चुनावी मंच तक ही सीमित रह जाती है।
