POCSO प्रकरण में तथ्यों को छुपाने का आरोप, न्यायिक आदेश को बताया अवैध- गोवर्धन सिंह

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जयपुर।
वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता गोवर्धन सिंह ने दैनिक भास्कर में प्रकाशित एक हालिया खबर पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि POCSO जैसे संवेदनशील अपराध से जुड़े मामले में अखबार ने जानबूझकर यह तथ्य जनता से छुपाया कि आरोप किन व्यक्तियों पर थे। गोवर्धन सिंह का दावा है कि इस प्रकरण में आरोपी स्वयं अखबार के मालिक थे, लेकिन खबर में यह जानकारी सामने नहीं लाई गई।

उन्होंने FIR दर्ज न होने को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सामान्य परिस्थितियों में POCSO जैसे अपराध में राजस्थान पुलिस तत्काल FIR दर्ज कर गिरफ्तारी करती है, किंतु स्टिंग वीडियो से जुड़े इस मामले में मीडिया संस्थान की ताकत के कारण कानून ने समान रूप से काम नहीं किया। उनका आरोप है कि यदि कोई सामान्य नागरिक होता, तो अब तक FIR दर्ज होकर कार्रवाई हो चुकी होती।

गोवर्धन सिंह ने स्पष्ट किया कि नए आपराधिक कानून BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) के लागू होने के बाद यह पूरी तरह स्थापित सिद्धांत है कि FIR देश के किसी भी पुलिस थाने में दर्ज कराई जा सकती है, भले ही अपराध की जगह कोई और हो। ऐसे में FIR दर्ज न होना कानून की मंशा के विपरीत बताया गया है।

उन्होंने न्यायालय द्वारा FIR दर्ज न करने एवं प्रारंभिक जांच तक रोकने के आदेश को पूर्णतः अवैध करार देते हुए कहा कि यह आदेश न केवल BNSS और POCSO अधिनियम की भावना के खिलाफ है, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्ववर्ती निर्णयों के भी विपरीत है, जिनमें गंभीर अपराधों में प्राथमिक जांच को अनिवार्य माना गया है।

गोवर्धन सिंह ने कहा कि वह जानते हैं कि उनके सामने “हाथी जैसे ताक़तवर लोग” हैं और वह स्वयं को एक “चींटी” मानते हैं, लेकिन नागरिक अधिकार, सत्य और ईश्वर उनके साथ हैं। उन्होंने ऐलान किया कि वह इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में शीघ्र चुनौती देंगे।

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कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि न्यायालय के आदेश में यह पाया जाता है कि FIR दर्ज करने से रोकना कानूनन उचित नहीं था, तो उच्च अदालत मामले में FIR दर्ज करने, स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराने या विशेष निगरानी में जांच के आदेश दे सकती है। इसके अतिरिक्त, न्यायिक आदेश की वैधता को संविधान के अनुच्छेद 226 अथवा 32 के तहत चुनौती दी जा सकती है।

गोवर्धन सिंह ने सभी वकील साथियों से अपील करते हुए कहा कि जब-जब कानून की हत्या होती है, तब-तब न्यायपालिका से जनता का भरोसा कमजोर होता है और यदि यह भरोसा टूट गया, तो आम व्यक्ति न्याय के लिए वकीलों के पास आना ही छोड़ देगा। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में न्यायालय के समक्ष ऐसी परिस्थितियाँ बनीं, जो सामान्यतः देखने को नहीं मिलतीं।

अंत में उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखते हुए वह इस पूरे प्रकरण पर वीडियो के माध्यम से भी अपना पक्ष रखेंगे और अंतिम सांस तक कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे

— गोवर्धन सिंह की ओर से जारी

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