27 संदिग्ध बैंक खातों की जांच; मुख्य सरगना की तलाश जारी
अजमेर। छात्रवृत्ति राशि को कथित रूप से अपात्र लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाने के मामले में अजमेर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पश्चिम बंगाल से 63 वर्षीय एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान मोहम्मद अलाउद्दीन पुत्र शाहरुद्दीन, निवासी नया बाड़ी, चोपड़ा, जिला उत्तर दिनाजपुर, पश्चिम बंगाल के रूप में हुई है।
मामला क्लॉक टावर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज प्रकरण में PSP ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से करीब 5 लाख 66 हजार रुपये की छात्रवृत्ति राशि कथित तौर पर अपात्र लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाने की शिकायत सामने आई थी। इसके बाद पुलिस ने छात्रवृत्ति भुगतान, बैंक खातों और रकम के लेन-देन की जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस को अब तक 27 संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी मिलने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक आरोपी से जुड़े एक बैंक खाते में करीब 27 हजार रुपये की राशि मिली, जिसे फिलहाल होल्ड करवाया गया है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि छात्रवृत्ति की राशि किन खातों में पहुंची और इन खातों के पीछे कौन लोग सक्रिय थे।
पश्चिम बंगाल तक पहुंची पुलिस की जांच
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हिमांशु जांगिड़ के अनुसार, पुलिस अधीक्षक/सीओ साउथ मनीष के नेतृत्व में क्लॉक टावर थाना पुलिस ने तकनीकी एवं बैंकिंग लेन-देन की जांच को आगे बढ़ाते हुए पश्चिम बंगाल तक पहुंच बनाई। कार्रवाई के दौरान आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
अब पुलिस की निगाह मामले के कथित मुख्य सरगना और अन्य संदिग्धों पर है। पुलिस के अनुसार कुछ संदिग्धों की पहचान की जा चुकी है और उनकी गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई जारी है। जांच का अगला चरण यह स्पष्ट करेगा कि फर्जी लाभार्थियों के नाम और बैंक खातों का इस्तेमाल किस नेटवर्क के माध्यम से किया गया तथा छात्रवृत्ति राशि को आगे कहां स्थानांतरित किया गया।
एक नहीं, छात्रवृत्ति फर्जीवाड़े के कई तार
अजमेर में छात्रवृत्ति से जुड़ा यह अकेला मामला नहीं है। इससे पहले 2026 में अजमेर में NSP (National Scholarship Portal) से जुड़े एक अलग कथित फर्जीवाड़े की जांच में भी पश्चिम बंगाल तक पुलिस कार्रवाई पहुंची थी। उस मामले में करीब 30 शिक्षण संस्थानों के नाम से फर्जी आवेदन और करीब 2,100 बैंक खातों से जुड़े लेन-देन की जांच की जानकारी सामने आई थी।
यानी छात्रवृत्ति के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग का सवाल अब केवल एक खाते या एक आरोपी तक सीमित नहीं रह गया है। जांच का असली सवाल यह है कि इस पूरे नेटवर्क में लाभार्थी, बैंक खाते, पोर्टल पर दर्ज जानकारी और राशि के ट्रांसफर के बीच कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।
