त्यौंथर में टमस नदी के जल आवंटन पर बवाल, न्यूक्लियर प्लांट के खिलाफ अधिवक्ताओं ने खोला मोर्चा; PM के नाम सौंपा ज्ञापन, उग्र आंदोलन की चेतावनी

Spread the love

रीवा। जिले के रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर विरोध के स्वर अब त्यौंथर तक पहुंच गए हैं। टमस (टोंस) नदी के पानी का औद्योगिक उपयोग के लिए आवंटन किए जाने के विरोध में त्यौंथर अधिवक्ता संघ ने मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर प्रधानमंत्री के नाम विरोध ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं तहसीलदार त्यौंथर पारसनाथ मिश्रा को सौंपा। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि टमस नदी के जल आवंटन की स्वीकृति निरस्त नहीं की गई और प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट का निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो आम जनता के साथ मिलकर व्यापक एवं उग्र जनआंदोलन किया जाएगा।अधिवक्ताओं के अनुसार, मध्य प्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग द्वारा 15 अप्रैल 2026 को जारी आदेश के तहत मेसर्स टाटा पावर लिमिटेड को रीवा जिले के ग्राम रोझौही में प्रस्तावित 4×220 मेगावाट क्षमता के न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए टमस नदी से प्रतिवर्ष 84.096 मिलियन घन मीटर (MCM) जल आवंटित करने की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई है। अधिवक्ताओं ने इस निर्णय पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में नदी के पानी का औद्योगिक उपयोग क्षेत्र की कृषि, पेयजल व्यवस्था और पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।

कृषि और सिंचाई पर संकट की आशंका

ज्ञापन में कहा गया है कि त्यौंथर अंचल की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। यहां के किसान सिंचाई के लिए टमस नदी और उससे जुड़े जल संसाधनों पर निर्भर हैं। ऐसे में नदी के पानी का बड़ा हिस्सा औद्योगिक परियोजना के लिए आवंटित होने से किसानों के सामने सिंचाई संकट खड़ा होने की आशंका है। अधिवक्ताओं ने सरकार से मांग की है कि किसानों के हितों और भविष्य की जल जरूरतों को प्राथमिकता दी जाए।

पेयजल और भूजल स्तर को लेकर चिंता

अधिवक्ताओं का कहना है कि टमस नदी केवल जलधारा नहीं, बल्कि पूरे तराई अंचल की जीवनरेखा है। नदी के जल का औद्योगिक उपयोग बढ़ने से आसपास के क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता और भूजल स्तर प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भविष्य में क्षेत्र में पानी की कमी होती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पर्यावरण पर सवाल

ज्ञापन में नदी पर बैराज एवं जल भंडारण संरचनाएं बनाए जाने की संभावनाओं को लेकर भी चिंता जताई गई है। अधिवक्ताओं के मुताबिक, इससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हो सकता है। जलीय जीवों, स्थानीय पारिस्थितिकी और नदी पर निर्भर ग्रामीण आबादी पर इसके संभावित प्रभावों का पहले व्यापक अध्ययन होना चाहिए।

रेडिएशन और स्वास्थ्य संबंधी आशंकाओं पर जताई चिंता

न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर अधिवक्ताओं ने रेडिएशन, औद्योगिक अपशिष्ट और जल प्रबंधन से जुड़े संभावित स्वास्थ्य जोखिमों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि परियोजना के संचालन के दौरान इस्तेमाल होने वाले पानी के उपचार, पुनः उपयोग और उत्सर्जन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने कैंसर, थायराइड सहित गंभीर बीमारियों की आशंकाओं का उल्लेख करते हुए स्वतंत्र वैज्ञानिक एवं पर्यावरणीय अध्ययन कराने की मांग की है।अधिवक्ताओं ने अपने ज्ञापन में वर्ष 2024 में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय शोध का भी हवाला दिया है। हालांकि, शोध का सटीक नाम, प्रकाशन और निष्कर्ष स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जाना आवश्यक है। उनका कहना है कि जनस्वास्थ्य से जुड़े इतने संवेदनशील विषय पर सरकार को किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।

अधिवक्ताओं की दो टूक- जल आवंटन और प्लांट दोनों निरस्त हों

त्यौंथर अधिवक्ता संघ ने सरकार से मांग की है कि टमस नदी से प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए 84.096 MCM वार्षिक जल आवंटन की सैद्धांतिक स्वीकृति तत्काल निरस्त की जाए। इसके साथ ही रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट की स्थापना का निर्णय भी वापस लिया जाए।अधिवक्ताओं का कहना है कि विकास के नाम पर किसानों के हित, आम नागरिकों का स्वास्थ्य, पेयजल और पर्यावरणीय सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि शासन ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो यह विरोध केवल ज्ञापन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम जनता को साथ लेकर व्यापक आंदोलन का रूप लेगा।

ये अधिवक्ता रहे मौजूद

प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने के दौरान अधिवक्ता संघ के सचिव प्रदीप मिश्रा, उपाध्यक्ष विवेक तिवारी, बालकृष्ण मिश्रा, पंकज तिवारी, संदीप पांडेय, अरविंद कुमार दुबे, अनिल कुमार तिवारी, सुनील कुमार साकेत, राजकिशोर मिश्रा, राजनारायण पांडेय, अजय कुमार साकेत एवं संजीव कुमार माझी सहित अन्य अधिवक्ता उपस्थित रहे।

टमस नदी जल आवंटन के विरोध में प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते त्यौंथर अधिवक्ता संघ के सदस्य

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *