रीवा। जिले के रोझौही में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार जारी है। परियोजना के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी रीवा के निर्देशन में 24 अक्टूबर से ‘डेरा डालो–घेरा डालो’ आंदोलन के तहत धरना दिया जा रहा है। आंदोलन में कांग्रेस संगठन के पदाधिकारी ग्रामीणों के साथ शामिल होकर परियोजना से जुड़े सवालों को उठा रहे हैं।इसी क्रम में धरना स्थल पर संगठन महासचिव जिला कांग्रेस कमेटी रीवा रवि तिवारी सहित कांग्रेस के कई पदाधिकारियों एवं वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति रही। आंदोलन में कांग्रेस की भागीदारी के जरिए ग्रामीणों की मांगों और आपत्तियों को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।धरना स्थल पर ब्लॉक अध्यक्ष बीरेंद्र पटेल, जिला कांग्रेस सचिव विवेकानंद तिवारी, वरिष्ठ नेता जनार्दन मिश्रा, सेवानिवृत्त रेंजर अम्बरीष पाण्डेय, मंडलम अध्यक्ष बीपी सिंह, पंचायत कमेटी अध्यक्ष कैलाश नाथ तिवारी, पंचायत संगठन संयोजक चंद्रभूषण द्विवेदी, बीएलए सत्येंद्र तिवारी एवं बीएलए रामाधार यादव सहित अन्य कांग्रेसजन उपस्थित रहे।
परियोजना को लेकर ग्रामीणों के सवाल, सहमति और जवाबदेही की मांग
रोझौही में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर जमीन, पर्यावरण, जल संसाधन, स्वास्थ्य सुरक्षा, विस्थापन और भविष्य की आजीविका जैसे विषयों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों की आपत्तियों के बीच यह मामला अब व्यापक सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।आंदोलनकारियों का जोर इस बात पर है कि किसी भी बड़ी औद्योगिक परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले प्रभावित ग्रामीणों की बात सुनी जाए और उनकी आशंकाओं का स्पष्ट समाधान किया जाए। परियोजना से संबंधित तथ्यों, प्रशासनिक निर्णयों और स्थानीय लोगों की सहमति को लेकर पारदर्शिता भी जरूरी मानी जा रही है।24 अक्टूबर से जारी ‘डेरा डालो–घेरा डालो’ आंदोलन के बीच कांग्रेस नेता रवि तिवारी सहित अन्य पदाधिकारियों की मौजूदगी ने आंदोलन को संगठनात्मक समर्थन दिया है। अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन ग्रामीणों की मांगों और उठाए जा रहे सवालों पर क्या रुख अपनाता है। रोझौही में जारी धरना अब विकास, जनसहमति और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों के केंद्र में है।

