विकास चाहिए, रेडिएशन नहीं!” रीवा में टाटा न्यूक्लियर प्लांट के खिलाफ जनसैलाब, बैकफुट पर प्रशासन रीवा में बड़ा बवाल: पुलिस बल के साथ पहुंचे अफसरों को ग्रामीणों ने घेरा, टाटा न्यूक्लियर प्लांट का काम ठप फर्जी एनओसी के सहारे न्यूक्लियर प्लांट? सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने उठाए शासन-प्रशासन पर गंभीर सवाल रोझौही में गर्जा जन-आक्रोश: जानिए क्यों टाटा के न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के खिलाफ खड़े हुए हजारों ग्रामीण दिनांक 09 अक्टूबर 2026 विशेष ब्यूरो रिपोर्ट, रीवा (मध्य प्रदेश):
रीवा जिले के सिरमौर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत सरई कला और रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर स्थानीय निवासियों और प्रशासन के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। दिनांक 09 अक्टूबर को जब प्रशासनिक टीम, पुलिस बल और कंपनी के अधिकारी परियोजना से जुड़ी अग्रिम प्रक्रिया के तहत एक बार पुनः बोरहोल करने पहुंचे, तो सरई कला, रोझौही और आसपास के कई गांवों के हजारों ग्रामीणों ने एकजुट होकर इसका कड़ा विरोध किया और काम रोक दिया।
प्रशासनिक दल और अधिकारियों की मौजूदगी
परियोजना स्थल पर स्थिति संभालने और बोरहोल की कार्यवाही पूरी कराने के लिए भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे थे। मौके पर प्रमुख रूप से:

प्रशासन एवं पुलिस:* सिरमौर तहसीलदार/नायब तहसीलदार बिंदु तिवारी, गढ़ थाना प्रभारी अवनीश पांडेय, लालगांव चौकी प्रभारी शैल यादव।*संस्थाएं व अधिकारी:* एमपीआईडीसी (MPIDC) के प्रमुख यूके तिवारी, एनपीसीआईएल (NPCIL) के वैज्ञानिक श्री जैन, टाटा कंपनी के प्रतिनिधि परशुराम मिश्रा व कंपनी के इंजीनियर।*स्थानीय जनप्रतिनिधि व समाजसेवी:* सरई सरपंच श्रीमती कोमल सिंह, लालगांव उपसरपंच प्रतिनिधि लवकुश तिवारी, समाजसेवी एवं पत्रकार आनंद द्विवेदी, सरपंच पति संजय सिंह और सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी मुख्य रूप से मौजूद रहे।
रेडिएशन और परमाणु कचरे के खतरे से सहमे ग्रामीण
प्रदर्शन के दौरान हजारों की संख्या में एकत्र ग्रामीणों ने टाटा कंपनी और न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। तहसीलदार बिंदु तिवारी, एमपीआईडीसी के अधिकारी यूके तिवारी और कंपनी के अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने और मनाने की काफी कोशिश की, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अडिग रहे। ग्रामीणों का कहना था कि न्यूक्लियर पावर प्लांट से निकलने वाले जहरीले कचरे और हानिकारक रेडिएशन से उनके क्षेत्र का पर्यावरण, स्वास्थ्य और भविष्य पूरी तरह तबाह हो जाएगा। ग्रामीणों ने स्पष्ट लहजे में प्रशासन से कहा, “यदि सरकार वाकई हमारा विकास चाहती है, तो यहां कोई अन्य उद्योग या व्यवसाय स्थापित करे, न कि जानलेवा न्यूक्लियर पावर प्लांट।”
फर्जी एनओसी और ग्राम सभा प्रस्ताव पर उठे सवाल
मौके पर मौजूद सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने प्रशासन के रवैये पर कड़ा एतराज जताते हुए लोकतंत्र और ग्राम सभा के अधिकारों का सम्मान करने की बात कही। उन्होंने सरपंच के नाम पर जारी कथित फर्जी एनओसी (पत्र क्रमांक 170/2026) का मुद्दा उठाते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की।द्विवेदी ने कहा कि ग्राम सभा द्वारा पूर्व में ही 03 सितंबर और 05 अक्टूबर 2026 को इस न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए जा चुके हैं। जब ग्राम पंचायत, आसपास के हजारों लोग और स्थानीय ग्राम सभा इस प्रोजेक्ट के पक्ष में नहीं हैं, तो शासन-प्रशासन आखिर किसके दबाव में जबरन इस परियोजना को क्षेत्र पर थोपने का प्रयास कर रहा है?
रोझौही में न्यूक्लियर पावर प्लांट के मामले में अब आगे क्या?

ग्रामीणों के कड़े रुख और विरोध प्रदर्शन को देखते हुए फिलहाल बोरहोल और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं को रोकना पड़ा है। क्षेत्र में जन-आक्रोश चरम पर है, और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक न्यूक्लियर पावर प्लांट की योजना को पूरी तरह रद्द नहीं किया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
