जांच समिति के सामने अधिवक्ता ने रखे अहम साक्ष्य, OT कॉरिडोर की फुटेज से लेकर डॉक्टरों के ड्यूटी रोस्टर और स्टाफ रजिस्टर तक खंगालने की मांग; सिरमौर चौक पर 13वें दिन भी पिता का अनशन जारी
रीवा। संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत का मामला अब जांच के उस पड़ाव पर पहुंच गया है, जहां अस्पताल में दर्ज बयानों के साथ-साथ CCTV फुटेज, ड्यूटी रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्य भी घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। शनिवार से मामले की मजिस्ट्रेटियल जांच शुरू हो गई है और इसी क्रम में अधिवक्ता जांच समिति के समक्ष उपस्थित होकर मृतका से जुड़े वीडियो सहित कई प्रमाण प्रस्तुत किए।मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि उस समय अस्पताल के भीतर वास्तव में क्या हुआ था और उपलब्ध तकनीकी रिकॉर्ड उस घटनाक्रम के बारे में क्या बताते हैं।

समिति के सामने पहुंचे अधिवक्ता, रखे प्रमाण
शनिवार दोपहर अधिवक्ता मजिस्ट्रेटियल जांच समिति के समक्ष पहुंचे। उन्होंने मामले से जुड़े अपना पक्ष रखते हुए उपलब्ध दस्तावेज और अन्य प्रमाण समिति के सामने प्रस्तुत किए।बताया गया कि मृतका से संबंधित वीडियो को भी जांच के दायरे में शामिल किए जाने की मांग की गई है। विशेष रूप से ऑपरेशन थिएटर से वायरल हुए वीडियो को घटनाक्रम की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।अब जांच समिति के सामने यह महत्वपूर्ण चुनौती होगी कि उपलब्ध वीडियो की वास्तविकता, समय और घटनाक्रम से उसके संबंध को किस तरह सत्यापित किया जाता है।
CCTV फुटेज खोलेगा घटनाक्रम की परतें?
अधिवक्ता की ओर से OT के बाहर के गलियारे का CCTV फुटेज जांच के लिए मंगाने की मांग की गई है। इसके पीछे तर्क यही है कि अस्पताल परिसर में उस दौरान कौन आया, कौन गया और किस समय कौन सी गतिविधियां हुईं—इन सवालों के जवाब तकनीकी रिकॉर्ड से मिल सकते हैं।यदि संबंधित अवधि का CCTV फुटेज सुरक्षित और उपलब्ध है तो वह जांच के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकता है।
डॉक्टरों का ड्यूटी रोस्टर और स्टाफ रजिस्टर भी जांच के घेरे में
मामले में केवल वीडियो ही नहीं, बल्कि अस्पताल के प्रशासनिक रिकॉर्ड को भी जांच का हिस्सा बनाने की मांग की गई है। डॉक्टरों के ड्यूटी रोस्टर और सहायक स्टाफ के रजिस्टर की जांच कराने का प्रस्ताव रखा गया है।इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि घटना के समय कौन-कौन से डॉक्टर और कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात थे तथा संबंधित समय में उनकी वास्तविक मौजूदगी क्या थी।
अधीक्षक कार्यालय की बातचीत भी जांच के दायरे में
अस्पताल अधीक्षक कार्यालय में हुई बातचीत से संबंधित उपलब्ध फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच कराने की मांग भी समिति के सामने रखी गई है।मामले में इन रिकॉर्ड्स को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अलग-अलग लोगों के बयान और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों का आपसी मिलान घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति समझने में मदद कर सकता है।
13वें दिन भी पिता का अनशन जारी
इधर कल्पना मिश्रा को न्याय दिलाने की मांग को लेकर उनके पिता राम शिरोमणि मिश्रा का सिरमौर चौक पर अनशन शनिवार को 13वें दिन भी जारी रहा। लंबे समय से चल रहे इस आंदोलन को राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिलने की बात सामने आई है।परिवार की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदारी तय की जाए।
अब जांच बयानों से आगे, रिकॉर्ड पर टिकी निगाहें
कल्पना मिश्रा मौत मामले में मजिस्ट्रेटियल जांच शुरू होने के साथ अब जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण तकनीकी और प्रशासनिक रिकॉर्ड का परीक्षण माना जा रहा है। CCTV फुटेज, ड्यूटी रोस्टर, स्टाफ रजिस्टर और अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्य यदि सुरक्षित हैं, तो इनके जरिए घटनाक्रम की टाइमलाइन तैयार की जा सकती है।हालांकि, किसी भी आरोप की पुष्टि जांच पूरी होने और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।फिलहाल रीवा की निगाहें मजिस्ट्रेटियल जांच पर टिकी हैं। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि उस रात अस्पताल में क्या हुआ—बल्कि यह भी है कि CCTV, ड्यूटी रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्य उस रात की कहानी के कौन से हिस्से सामने लाते हैं।अब बयानों के बाद बारी रिकॉर्ड की है, और इन्हीं रिकॉर्ड्स से कल्पना मिश्रा मौत मामले की कई अनसुलझी कड़ियों के जुड़ने की उम्मीद की जा रही है।
