सरई कोठार की सड़क बनी सिस्टम की अनदेखी की तस्वीर, आवेदन और नोटिस के बाद भी नहीं बदली बदहाली

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गड्ढों में भरा पानी, कीचड़ से सराबोर रास्ता और उसी मार्ग से स्कूल जाने को मजबूर बच्चे; ग्रामीण बोले—कागजों पर नहीं, जमीन पर चाहिए कार्रवाई, नहीं तो आमरण अनशन

रीवालालगांव सरई। जनपद पंचायत गंगेव अंतर्गत ग्राम पंचायत सरई कला राजस्व ग्राम सरई कोठार में सड़क की बदहाल स्थिति ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बारिश के बीच रास्ते पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढों में पानी भर गया है और कीचड़ ने आवागमन को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंताजनक स्थिति उन स्कूली बच्चों की है, जिन्हें इसी रास्ते से होकर विद्यालय जाना पड़ता है।ग्रामीणों का कहना है कि त्रिवेणी पाल के घर से सीताराम मिश्रा के घर तक का रास्ता लंबे समय से खराब है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे होने के कारण पैदल चलना तो मुश्किल है ही, साइकिल और दोपहिया वाहन निकालना भी जोखिम भरा हो गया है। बारिश के बाद गड्ढों में पानी भर जाने से कई जगह सड़क और गड्ढे के बीच अंतर करना तक मुश्किल हो जाता है।

आवेदन गया, शिकायत हुई, नोटिस भी हुआ—फिर भी सड़क वहीं की वहीं

सड़क की समस्या को लेकर ग्रामीणों ने 14 अगस्त 2026 को संबंधित अधिकारियों के समक्ष लिखित आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन में रास्ते की खराब स्थिति का उल्लेख करते हुए तत्काल निरीक्षण एवं सुधार कार्य कराने की मांग की गई थी।शिकायत के बाद संबंधित स्तर पर तत्काल निरीक्षण/निगरानी कराने और सरपंच को नोटिस जारी किए जाने की कार्रवाई का उल्लेख भी सामने आया। इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की वास्तविक स्थिति में अब तक अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है।यहीं से सवाल खड़ा होता है—जब समस्या अधिकारियों के संज्ञान में है, आवेदन मौजूद है और नोटिस तक जारी हो चुका है, तो फिर सड़क सुधार का काम धरातल पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा?

बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल

ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता स्कूली बच्चों को लेकर है। खराब रास्ते पर बच्चे साइकिल लेकर निकलते हैं। गड्ढों में पानी और आसपास फैली कीचड़ के कारण कभी भी संतुलन बिगड़ने से दुर्घटना हो सकती है।ग्रामीणों का कहना है कि हादसा होने के बाद जिम्मेदारी तय करने से बेहतर है कि हादसे से पहले रास्ता ठीक कर दिया जाए। आखिर कब कोई बच्चा इस रास्ते पर घायल हो जाए, इसकी गारंटी कौन लेगा?

विकास कार्यों पर भी उठ रहे सवाल

सड़क की मौजूदा हालत को लेकर ग्रामीणों के बीच विकास कार्यों की गुणवत्ता और खर्च होने वाली राशि को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इन सवालों की वास्तविकता स्थलीय जांच और संबंधित अभिलेखों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है, लेकिन ग्रामीणों की मांग है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर सड़क की स्थिति के साथ-साथ पूर्व में हुए निर्माण एवं मरम्मत कार्यों की भी वास्तविक स्थिति देखें।ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी राशि का उद्देश्य ग्रामीणों को सुविधा देना है, न कि ऐसी सड़क छोड़ देना जहां बारिश में बच्चों और आम लोगों का निकलना मुश्किल हो जाए।

“जिम्मेदारों के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही”

लगातार परेशानी के बावजूद समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी समस्या कई बार सामने आ चुकी है, लेकिन जिस तेजी से कार्रवाई जमीन पर दिखाई देनी चाहिए, वह नजर नहीं आ रही।उनका सीधा सवाल है—आवेदन और नोटिस के बाद भी यदि सड़क नहीं सुधरेगी तो फिर ग्रामीण अपनी समस्या लेकर आखिर कहां जाएं?

जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आमरण अनशन की चेतावनी

अब ग्रामीणों ने मामले में जल्द कार्रवाई की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क का निरीक्षण कराकर शीघ्र सुधार कार्य शुरू नहीं कराया गया तो वे आमरण अनशन जैसे आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होंगे।ग्रामीणों की मांग साफ है—कागजों में नहीं, मौके पर कार्रवाई चाहिए।सरई कोठार की सड़क आज केवल आवागमन की समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा बन गई है। आवेदन से लेकर नोटिस तक कार्रवाई की शुरुआत तो हो चुकी, लेकिन अब निगाहें इस बात पर हैं कि जिम्मेदार अधिकारी कब मौके पर पहुंचेंगे और कब गड्ढों, जलभराव व कीचड़ से जूझ रहे ग्रामीणों को वास्तविक राहत मिलेगी।क्योंकि सड़क पर पड़े गड्ढे सिर्फ मिट्टी और पानी से नहीं भरे हैं—वे व्यवस्था से पूछ रहे हैं कि आखिर ग्रामीणों की इस परेशानी का अंत कब होगा?

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