कल्पना मिश्रा मौत मामले में प्रशासन का पीड़ित परिवार को भरोसा—निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जारी, कलेक्टर बोले- शासन-प्रशासन को अनशनकारी के स्वास्थ्य की पूरी चिंता
रीवा। संजय गांधी अस्पताल में उपचार के दौरान कल्पना मिश्रा की मौत के बाद न्याय और दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर सिरमौर चौराहे पर आमरण अनशन कर रहे मृतका के पिता राम शिरोमणि मिश्रा से मिलने मंगलवार को रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी और पुलिस अधीक्षक गुरकरन सिंह स्वयं अनशन स्थल पहुंचे। वरिष्ठ अधिकारियों की इस मुलाकात में प्रशासन ने पीड़ित परिवार की बात सुनी और पूरे प्रकरण में निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिलाया।अनशन स्थल पर पहुंचते ही कलेक्टर ने राम शिरोमणि मिश्रा के स्वास्थ्य की जानकारी ली। लगातार अनशन के कारण उनके स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए कलेक्टर ने उनसे स्वास्थ्य परीक्षण कराने का विनम्र आग्रह किया। उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन उनके स्वास्थ्य को लेकर गंभीर है और किसी भी स्थिति में उनके स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं की जा सकती।कलेक्टर ने पीड़ित पिता से बातचीत के दौरान कल्पना मिश्रा के असमय निधन को बेहद पीड़ादायक बताते हुए परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले की जांच को पूरी गंभीरता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है और जांच की प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा निष्पक्षता बनाए रखी जाएगी।वहीं पुलिस अधीक्षक गुरकरन सिंह ने भी पीड़ित परिवार से बातचीत की और प्रकरण को लेकर प्रशासनिक स्तर पर की जा रही कार्रवाई के संबंध में जानकारी ली। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों का अनशन स्थल पर पहुंचना इस बात का संकेत रहा कि प्रशासन मामले को लेकर सीधे पीड़ित परिवार से संवाद बनाए हुए है।
26 अगस्त को हुई थी कल्पना मिश्रा की मौत
गौरतलब है कि 26 अगस्त को कल्पना मिश्रा को संजय गांधी अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल में उपचार के दौरान गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। मृतका के पिता राम शिरोमणि मिश्रा ने जिम्मेदार चिकित्सकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग को लेकर सिरमौर चौराहे पर आमरण अनशन शुरू किया है।प्रकरण को लेकर शासन स्तर से भी कार्रवाई की जा चुकी है। उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के निर्देशों के बाद मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है और मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं। इसके साथ ही पीड़ित परिवार के लिए आर्थिक सहायता स्वीकृत किए जाने की जानकारी दी गई है।अस्पताल प्रशासन के स्तर पर भी कार्रवाई हुई है। डीन और अधीक्षक को उनके पद से हटाया गया है, जबकि दो नर्सिंग ऑफिसरों और दो चिकित्सकों के निलंबन की कार्रवाई की गई है।अब पूरे मामले की जांच पर निगाहें टिकी हैं। पीड़ित परिवार जहां दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग पर कायम है, वहीं प्रशासन की ओर से जांच को निष्पक्ष तरीके से पूरा कराने और अनशनकारी के स्वास्थ्य की निगरानी पर जोर दिया जा रहा है।
