कल्पना मिश्रा मौत मामले ने पकड़ा राजनीतिक तूल, पीड़ित परिवार के आंदोलन के बीच कांग्रेस नेताओं के आमने-सामने आने से बढ़ी हलचल
रीवा। संजय गांधी अस्पताल में कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत का मामला अब केवल अस्पताल की व्यवस्था और जिम्मेदारी तय करने तक सीमित नहीं रह गया है। पीड़ित परिवार न्याय की मांग को लेकर आंदोलन पर है और प्रशासनिक स्तर पर जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन इसी बीच इस संवेदनशील मामले ने कांग्रेस के भीतर भी सियासी तापमान बढ़ा दिया है। कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा के एक बयान के बाद जिला कांग्रेस संगठन की ओर से आया जवाब अब चर्चा का विषय बन गया है।मामले को लेकर आंदोलन को समर्थन दे रहे कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने सवाल उठाया कि जब मामला इतना गंभीर है तो कांग्रेस के महापौर अजय मिश्रा ‘बाबा’ को भी पीड़ित परिवार के समर्थन में धरने पर बैठना चाहिए। विधायक की इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हुई तो जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने भी अपने अंदाज में जवाब दे दिया।जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने चुटीले अंदाज में कहा कि “जरूरत पड़ी तो अभय मिश्रा जी को भी साथ में धरने पर बैठाएंगे।” इस एक बयान ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया। अब अस्पताल प्रकरण को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश के साथ कांग्रेस के नेताओं के बीच बयानबाजी भी सुर्खियों में आ गई है।
पीड़ित पिता का आंदोलन बना सियासत का केंद्र
कल्पना मिश्रा के पिता रामशिरोमणि मिश्रा अपनी बेटी और नवजात को खोने के बाद जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मामले में सिर्फ प्रारंभिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है और जिम्मेदारी जिस स्तर तक बनती है, वहां तक कार्रवाई पहुंचनी चाहिए।इसी मामले में प्रशासन की ओर से मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए जा चुके हैं। वहीं अस्पताल से जुड़े कुछ चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ पर पहले ही निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है। बावजूद इसके परिवार का आक्रोश कम नहीं हुआ है। अब राजनीतिक दल भी इस मुद्दे को लेकर सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।
अभय मिश्रा के बयान से बढ़ी हलचल
कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा लगातार पीड़ित परिवार के समर्थन में अपनी आवाज उठा रहे हैं। उनका रुख सरकार और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ काफी मुखर है। इसी क्रम में उन्होंने कांग्रेस महापौर की भूमिका पर भी सवाल खड़ा करते हुए उन्हें आंदोलन में शामिल होने की बात कही।विधायक के इस बयान के बाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा की प्रतिक्रिया सामने आई। उनका कहना था कि आवश्यकता हुई तो विधायक अभय मिश्रा को भी धरने पर साथ बैठाया जाएगा। बयान भले ही राजनीतिक अंदाज में दिया गया हो, लेकिन इसने रीवा कांग्रेस की राजनीति में चल रही खींचतान को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
एक तरफ परिवार का दर्द, दूसरी तरफ राजनीतिक बयानबाजी
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे संवेदनशील पक्ष यह है कि केंद्र में एक परिवार का ऐसा दर्द है, जिसने अपनी बेटी और नवजात को खोया है। परिवार लगातार जवाबदेही की मांग कर रहा है। दूसरी ओर अब इसी मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।मृतका के पिता की मांग है कि जांच निष्पक्ष हो, दोषियों की पहचान हो और जिम्मेदारी तय होने के बाद कठोर कार्रवाई की जाए। परिवार केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं है। ऐसे में कांग्रेस नेताओं के बीच सामने आई बयानबाजी ने इस पूरे मामले को राजनीतिक बहस का नया विषय बना दिया है।
अब सवाल अस्पताल से आगे, कांग्रेस की राजनीति पर भी
फिलहाल इतना तय है कि कल्पना मिश्रा की मौत का मामला रीवा में अब सिर्फ अस्पताल की जवाबदेही का मुद्दा नहीं रहा। यह सरकार के खिलाफ विपक्ष के आंदोलन के साथ-साथ कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में भी एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।आने वाले दिनों में इस मामले पर होने वाली हर गतिविधि पर रीवा की नजर रहेगी।
