
रीवा। जिले में बाढ़ से पैदा हुए हालात और अन्य जनसमस्याओं को लेकर कांग्रेस नेताओं का प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर कार्यालय पहुंचा। अधिकारियों के समक्ष समस्याएं और प्रशासनिक स्तर पर सामने आ रही दिक्कतें रखने के दौरान माहौल उस समय खासा दिलचस्प हो गया, जब कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के सामने ही अधिकारियों के फोन नहीं उठाने की शिकायत रख दी।कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कलेक्टर से सीधे सवालिया लहजे में कहा कि “मैं जिला कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष हूं, लेकिन फिर भी आप मेरा फोन नहीं उठाते और न ही जिले का कोई SDM फोन उठाता है।” जिलाध्यक्ष की इस शिकायत ने मुलाकात के दौरान प्रशासन और विपक्ष के बीच संवाद को लेकर सवाल खड़े कर दिए।शिकायत पर कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने भी जवाब देने में देर नहीं की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “मेरा मानना है कि किसी का फोन उठे न उठे, काम होना चाहिए।” कलेक्टर के इस जवाब ने बातचीत को और अधिक चर्चा में ला दिया।दरअसल, बाढ़ के बाद जिले के कई इलाकों में राहत, पुनर्वास और मूलभूत सुविधाओं को लेकर राजनीतिक दल लगातार प्रशासन के समक्ष अपनी बात रख रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस नेताओं और कलेक्टर के बीच हुई यह मुलाकात केवल समस्याओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच संवाद के तरीके को लेकर भी बहस का विषय बन गई।मुलाकात के दौरान सामने आया यह सवाल-जवाब का सीधा संवाद अब रीवा के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। विपक्ष की ओर से प्रशासन से संपर्क और समस्याओं के समाधान को लेकर सवाल उठाए गए, जबकि कलेक्टर ने फोन पर बातचीत से अधिक प्राथमिकता समस्याओं के वास्तविक निराकरण को दिए जाने की बात कही।
सवाल फोन का नहीं, व्यवस्था तक पहुंच का है!
रीवा की सियासत में इस मुलाकात को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच संवाद की दूरी आखिर कितनी है? कांग्रेस जिलाध्यक्ष की शिकायत और कलेक्टर का जवाब आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और हवा दे सकता है।
