नामांकन की अंतिम तारीख नजदीक आते ही दावेदारों का दबाव बढ़ा, बगावत और निर्दलीय मैदान में उतरने की तैयारी से दलों की चिंता बढ़ी
जयपुर। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। चुनावी मैदान में उतरने के इच्छुक दावेदारों की नजर अब राजनीतिक दलों की अधिकृत सूची पर टिकी है। नामांकन की अंतिम तारीख नजदीक आने के साथ ही भाजपा और कांग्रेस दोनों में टिकट को लेकर अंदरूनी खींचतान और दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है। कई वार्डों में टिकट नहीं मिलने की स्थिति में बागी अथवा निर्दलीय उम्मीदवारों के मैदान में उतरने की संभावना ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।
राज्य में नगरीय निकाय चुनाव के तहत बड़ी संख्या में वार्डों में मुकाबला होना है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर उम्मीदवार का व्यक्तिगत प्रभाव, संगठन की पकड़ और जातीय-सामाजिक समीकरण चुनाव परिणाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। टिकट वितरण के दौरान पार्टियों के सामने पुराने कार्यकर्ताओं, नए दावेदारों और जीत की संभावनाओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।
अजमेर सहित कई प्रमुख शहरों में चुनावी गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। संभावित प्रत्याशियों ने जनसंपर्क बढ़ा दिया है और वार्ड स्तर पर राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। टिकट की घोषणा के बाद सामने आने वाला असंतोष कई वार्डों में मुकाबले को त्रिकोणीय या बहुकोणीय बना सकता है।
अब सबकी नजर 31 अगस्त की नामांकन प्रक्रिया और इसके बाद सामने आने वाली अंतिम उम्मीदवार सूची पर है। इसी के साथ यह स्पष्ट होगा कि कौन पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी के रूप में मैदान में है और कौन बगावत कर निर्दलीय के रूप में चुनावी चुनौती पेश करता है।
