नई दिल्ली/वॉशिंगटन/तेहरान, 10 जुलाई। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच हाल के दिनों में सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों के बाद पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति गंभीर बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के अनुसार, ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों और हितों को निशाना बनाते हुए खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों में जवाबी हमले किए हैं। इसके बाद अमेरिका ने भी ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की है। इस बीच दक्षिणी ईरान में कुछ हवाई हमलों की भी सूचना मिली है, जिनकी आधिकारिक जिम्मेदारी किसी पक्ष ने नहीं ली है।
तनाव के बीच ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने चेतावनी दी है कि देश के बुनियादी ढांचे पर किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा। वहीं अमेरिका ने कहा है कि कूटनीतिक संपर्क पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं और तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी है।
इस घटनाक्रम का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा जोखिम बढ़ने से कच्चे तेल की आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं गहरा गई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि तनाव लंबा खिंचता है तो अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका प्रभाव भारत सहित तेल आयात करने वाले देशों की महंगाई पर पड़ सकता है।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील कर रहा है। स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
स्रोत: Reuters, Associated Press (AP), U.S. Central Command (CENTCOM),
