राजस्थान में कोचिंग केंद्रों पर नया फैसला: उम्र सीमा की रोक हटाई गई

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जयपुर। राजस्थान सरकार ने शिक्षा से जुड़े एक बड़े और चर्चित फैसले में कोचिंग संस्थानों में प्रवेश के लिए उम्र सीमा पर लगी रोक हटा दी है। पहले केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार 16 वर्ष से कम आयु के छात्रों को किसी भी तरह की प्रतियोगी परीक्षा की कोचिंग में प्रवेश पर रोक थी। लेकिन अब राज्य सरकार ने अपने नए ड्राफ्ट “The Rajasthan Coaching Centre (Control and Regulation) Bill, 2025” में इस प्रतिबंध को शामिल नहीं किया है।

केंद्र की एडवाइजरी को राजस्थान ने नहीं माना

राजस्थान सरकार ने नए बिल में उम्र सीमा हटाकर छात्रों को कोचिंग में प्रवेश की स्वतंत्रता दी गई।

सरकार का मानना है कि कोचिंग अब केवल प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई स्किल डेवलपमेंट और करियर गाइडेंस कोर्स भी उपलब्ध कराती है।

👉 क्यों है चर्चा में?

शिक्षा जगत में इस फैसले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं।

कुछ जानकार मानते हैं कि जल्दी कोचिंग से बच्चों पर अनावश्यक दबाव बढ़ सकता है।

जबकि कई अभिभावक इसे अवसर बढ़ाने वाला कदम बता रहे हैं।

👉 सरकार को क्या करना चाहिए?

1 मानसिक स्वास्थ्य पर निगरानी – कोचिंग संस्थानों में काउंसलर और हेल्पलाइन ज़रूरी की जाएं।

2 बच्चों की पढ़ाई का संतुलन – स्कूल शिक्षा और कोचिंग के बीच तालमेल बनाए रखने के लिए नियम तय हों।

3 पारदर्शिता और सुरक्षा – संस्थानों पर सख्त निगरानी रखी जाए ताकि बच्चों के साथ शोषण या दबाव जैसी स्थिति न बने।

जनता के लिए संदेश

विशेषज्ञों की राय है कि बच्चों को कम उम्र में कोचिंग भेजने का फ़ैसला सोच-समझकर लिया जाए। सिर्फ़ प्रतियोगी परीक्षाओं की दौड़ में कूदने की बजाय बच्चों की रुचि, मानसिक तैयारी और स्वास्थ्य पर ध्यान देना सबसे ज़रूरी है।

सरकार ध्यान दे

राजस्थान सरकार को चाहिए कि कोचिंग बिल में सिर्फ उम्र सीमा हटाने तक ही सीमित न रहे, बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और भविष्य की दिशा के लिए ठोस कदम भी उठाए।

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