“अब वायरल नहीं होगी निजी ज़िंदगी!” हाईकोर्ट सख्त, बच्चों पर भी सोशल मीडिया को लेकर बड़ा प्रस्ताव
जयपुर । डिजिटल निजता को लेकर सख्ती बढ़ाते हुए राजस्थान हाईकोर्ट की जस्टिस फरजंद अली की बेंच ने स्पष्ट आदेश दिया है कि किसी भी व्यक्ति के निजी फोटो या वीडियो को बिना अनुमति सोशल मीडिया पर प्रसारित करना मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और ऐसे कंटेंट को तुरंत हटाना प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी होगी। अदालत ने और 2021 के आईटी नियमों के तहत यह सख्ती दिखाई है, जिसका आधार सुप्रीम कोर्ट के फैसले में स्थापित निजता के अधिकार को माना गया है। इसी बीच डिजिटल सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए एक संसदीय समिति ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश भी की है, ताकि कम उम्र के बच्चों को साइबर अपराध, अश्लील सामग्री और मानसिक प्रभावों से बचाया जा सके।
फैसलों का मकसद साफ है—डिजिटल प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाना, आम नागरिक की गरिमा की रक्षा करना और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखना। अब आम लोगों को चाहिए कि किसी भी आपत्तिजनक या निजी कंटेंट के वायरल होने पर तुरंत शिकायत दर्ज करें, जबकि सोशल मीडिया कंपनियों को भी तेजी से कार्रवाई करनी होगी, क्योंकि अब कानून और व्यवस्था दोनों ही ऑनलाइन दुनिया में अनुशासन और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं।
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