2 हजार की रिश्वत पड़ी भारी: 9 साल पुराने मामले में पंचायत सचिव को 5 साल की सजा, ₹20 हजार जुर्माना

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इंदिरा आवास योजना की दूसरी किस्त के लिए मांगे थे ₹4 हजार, ₹2 हजार लेते लोकायुक्त ने रंगे हाथ पकड़ा था; विशेष न्यायालय ने सुनाया फैसला

सीधी। इंदिरा आवास योजना की दूसरी किस्त जारी कराने के एवज में रिश्वत मांगने वाले तत्कालीन पंचायत सचिव को करीब नौ साल पुराने मामले में विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम ने दोषी ठहराया है। अदालत ने नौगवां पंचायत के तत्कालीन सचिव कन्हैया लाल साकेत को 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।मामला वर्ष 2017 का है। जानकारी के अनुसार इंदिरा आवास योजना के हितग्राही इंदल बसोर की दूसरी किस्त जारी करने के एवज में तत्कालीन पंचायत सचिव ने चार हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। आरोप है कि मांग की गई रकम में से दो हजार रुपये बतौर अग्रिम भी लिए गए थे।

लोकायुक्त से की थी शिकायत

रिश्वत की मांग से परेशान हितग्राही ने मामले की शिकायत लोकायुक्त रीवा में की। शिकायत प्राप्त होने के बाद लोकायुक्त टीम ने आरोपों का सत्यापन कराया। सत्यापन में शिकायत की पुष्टि होने के बाद आरोपी पंचायत सचिव को रिश्वत लेते पकड़ने की योजना बनाई गई।

हनुमान मंदिर के पास लेते ही दबोचा

लोकायुक्त की टीम ने 19 दिसंबर 2017 को कार्रवाई की। शिकायतकर्ता को तय रकम के साथ आरोपी के पास भेजा गया। सेमरिया बाजार स्थित हनुमान मंदिर के पास जैसे ही पंचायत सचिव कन्हैया लाल साकेत ने दो हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार की, लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।कार्रवाई के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच पूरी की गई और मामले की केस डायरी विशेष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई।

करीब नौ साल चली न्यायिक प्रक्रिया

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय में प्रकरण से जुड़े साक्ष्यों और तथ्यों पर विचार किया गया। करीब नौ वर्ष चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम ने पंचायत सचिव को दोषी ठहराते हुए 5 वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।

छोटी रकम, लेकिन लंबी चली कार्रवाई

इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर किसी हितग्राही से अवैध रकम की मांग किस तरह भ्रष्टाचार के गंभीर मामले में बदल सकती है। महज दो हजार रुपये लेते पकड़े गए पंचायत सचिव के खिलाफ कार्रवाई वर्ष 2017 से चली और अब अदालत के फैसले के साथ मामले में महत्वपूर्ण न्यायिक परिणाम सामने आया है।अदालत का यह फैसला सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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