नई दिल्ली। (एजेंसी) NHRC,ने उत्तर प्रदेश में एक नाबालिग बालक की खुले नाले में गिरकर हुई कथित मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि स्थानीय प्रशासन की लापरवाही या शिकायतों के बावजूद नाले को ढकने में विफलता सामने आती है, तो यह जीवन के अधिकार का उल्लंघन माना जाएगा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, क्षेत्रवासियों ने पहले भी नाले को ढकने की मांग की थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
कानूनी प्रावधानों के तहत यदि जांच में किसी अधिकारी या जिम्मेदार निकाय की घोर लापरवाही सिद्ध होती है, तो भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304A के तहत “लापरवाही से मृत्यु कारित करना” लागू हो सकती है, जिसमें अधिकतम दो वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। यदि किसी लोकसेवक द्वारा अपने वैधानिक कर्तव्य की जानबूझकर अवहेलना पाई जाती है, तो IPC की धारा 166 के तहत कार्रवाई संभव है। इसके अतिरिक्त संबंधित नगर निकाय या विभागीय अधिकारियों पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही, निलंबन या सेवा से बर्खास्तगी जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत एनएचआरसी संबंधित राज्य सरकार को मुआवजा देने, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन चलाने और पीड़ित परिवार को राहत उपलब्ध कराने की सिफारिश कर सकता है। आयोग की सिफारिशें बाध्यकारी तो नहीं होतीं, लेकिन राज्य सरकार को उस पर कार्रवाई रिपोर्ट देना अनिवार्य होता है। यदि दोष सिद्ध होता है, तो पीड़ित परिवार को आर्थिक मुआवजा, जिम्मेदारों पर आपराधिक मुकदमा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संरचनात्मक सुधार सुनिश्चित किए जा सकते हैं। इस मामले में अब निगाहें प्रशासनिक रिपोर्ट और उसके बाद संभावित कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।
