20 साल में 21 RTI कार्यकर्ताओं की हत्या, 600 पर हमले

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खबर वन न्यूज
दिनांक: 3 मार्च 2026

भास्कर इन्वेस्टिगेशन का खुलासा – लोकतंत्र के पहरेदारों पर सुनियोजित वार

(सोर्स: – भास्कर इन्वेस्टिगेशन)

देश में सूचना के अधिकार (RTI) को पारदर्शिता का हथियार माना गया, लेकिन पिछले 20 वर्षों के आंकड़े लोकतंत्र की एक भयावह तस्वीर पेश कर रहे हैं। भास्कर इन्वेस्टिगेशन के अनुसार वर्ष 2006 से 2026 के बीच 21 आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई, जबकि 600 से अधिक पर हमले हुए। यह आंकड़े केवल दर्ज मामलों के हैं, असल संख्या इससे कहीं अधिक होने की आशंका जताई जा रही है।

रिपोर्ट में सामने आया है कि जिन कार्यकर्ताओं ने भ्रष्टाचार, अवैध खनन, जमीन घोटालों, ठेकेदारी और स्थानीय निकायों में गड़बड़ियों को उजागर करने की कोशिश की, वे निशाने पर आए। कई मामलों में पहले धमकियां दी गईं, फिर हमला हुआ और अंततः हत्या तक की घटनाएं सामने आईं।

चौंकाने वाली बात यह है कि अनेक मामलों में आज तक निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो सकी है। कई केस वर्षों से पेंडिंग हैं, कुछ में चार्जशीट तक दाखिल नहीं हुई। वहीं ऐसे आरोप भी सामने आते रहे हैं कि कुछ मामलों में कथित आरोपी प्रभावशाली पदों पर बैठे हैं या सत्ता से जुड़े होने के कारण जांच की दिशा प्रभावित हुई।

सूचना आयोग द्वारा मुआवजे की घोषणाएं और औपचारिक कार्रवाई तो हुई, लेकिन जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था नाकाफी साबित हुई है। सरकारें पारदर्शिता की बात तो करती हैं, पर जब भ्रष्टाचार उजागर करने वाले कार्यकर्ता ही असुरक्षित हों, तो यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।

भ्रष्टाचार के प्रति सरकारों का नरम रवैया और जांच एजेंसियों की सुस्ती ने कई परिवारों को न्याय से वंचित रखा है। लोकतंत्र में सूचना का अधिकार एक संवैधानिक ताकत है, लेकिन यदि सच बोलने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी, तो यह अधिकार केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।

खबर वन न्यूज मांग करता है कि सभी लंबित मामलों की समयबद्ध न्यायिक जांच हो, दोषियों की राजनीतिक हैसियत चाहे जो भी हो, उन्हें सजा मिले और आरटीआई कार्यकर्ताओं के लिए विशेष सुरक्षा कानून लागू किया जाए। लोकतंत्र के पहरेदारों की सुरक्षा ही लोकतंत्र की असली मजबूती है।

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